लोकसभा के बाद राज्यसभा में पास हुआ सवर्ण आरक्षण बिल
सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी बिल राज्यसभा में पेश होगा।
नई दिल्ली। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने संबधी विधेयक लोकसभा में कल पारित हो गया। ये बिल आज राज्यसभा में पेश किया गया जिसपर चर्चा जारी है। इस बिल के कारण राज्यसभा की कार्यवाही को एक दिन के लिए बढ़ाया गया था, जिसका आज विपक्षी दलों ने विरोध किया। सरकार की कोशिश है कि इस बिल को उच्च सदन में पास कराया जाए। कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि सरकार की मंशा इस बिल को पास कराने की नहीं, बल्कि इसका राजनीतिक लाभ लेने की है।

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शिरोमणि अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल ने कहा कि देश में नौकरियों की कमी है। नौकरियां घट रही हैं, ऐसे में देश का युवा चिंतित है। गुजराल ने कहा कि देश में नई नौकरियां पैदा की जाने की जरूरत है। गुजराल ने कहा कि बांग्लादेश ने और चीन ने हाल में जिस तरह से खुद को संवारा है, उससे सीखा जाना चाहिए।
कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि संविधान संशोधन एक दिन में नहीं होता है। इस तरह के बिल के लिए समय चाहिए होता है। आप संविधान बदलने जा रहे हैं लेकिन इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजना नहीं चाहते। बिल लाने से पहले सरकार ने कोई डाटा तैयार नहीं किया, बिना किसी डाटा और रिपोर्ट के आप संविधान संशोधन करने जा रहे हो।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस ने क्यों अगड़ी जातियों की फिक्र नहीं, हम आरक्षण दे रहे हैं तो उस पर भी सवाल उठा रहे हैं। मोदी सरकार गरीबों के हर वर्ग की चिंता करती है। उनके लिए आरक्षण बिल लाकर आज संसद इतिहास बना रही है। बिल देरी से लाने के आरोपों पर कानून मंत्री ने कहा कि क्रिकेट में छक्का स्लॉग ओवरों में लगता है, उनकी सरकार वही कर रही है।
मनोज झा ने कहा, ये सरकार जातिगत आरक्षण को खत्म करना चाहती है। वो कह रहे हैं कि गरीबी की जाति नहीं होती, ये सिर्फ एक फिल्मी डायलॉग है। जातियों में ही गरीबी है। ओबीसी, एससी-एसटी और मुस्लिमों में चले जाइए, 90 फीसदी लोग गरीब मिलेंगे। उन्होंने आठ लाख की आमदनी वाले सवर्ण जाति के परिवार को गरीब मानने पर भी एतराज जताया। झा ने ससंद में झुनझुना बजाकर कहा कि सरकार सबको झुनझुना दिखा रही है।
टीआरएस के सांसद प्रकाश बांडा ने बिल बिल का समर्थन करते हुए कहा कि पहली बार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण दिया जा रहा है, ये अच्छा फैसला है। महिलाओं को भी 33 फीसदी आरक्षण से जुड़ा बिल भी पारित होना चाहिए। वहीं एससी-एसटी का आरक्षण भी उनकी आबादी के अनुपात में बढ़ाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रयन ने कहा कि ये आरक्षण बिल लाकर भाजपा ने अपने पापों को स्वीकार किया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि साढ़े चार साल में वो कोई नौकरी पैदा नहीं कर सके। ये बिल भारत की गरीबी रेखा को भी फिर से परिभाषित करता है। अब 32 रुपए रोज की जगह 2100 रुपए कमाने वाला गरीब है।
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