जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: रायबरेली और मैनपुरी में पहली बार जीती BJP, सपा-कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी
लखनऊ, जुलाई 4। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा ने जोरदार जीत दर्ज की। राज्य की 75 सीटों में से भाजपा ने 67 पर जीत दर्ज की है। बीजेपी की इस धमाकेदार जीत ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। कांग्रेस और सपा के लिए चिंता करने वाली बात ये भी है कि इन दोनों पार्टियों को अपने गढ़ में ही हार का सामना करना पड़ा है।
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मुलायम और सोनिया गांधी के गढ़ में लगी सेंध
दरअसल, कांग्रेस को रायबरेली से हार का सामना करना पड़ा तो वहीं समाजवादी पार्टी को मैनपुरी में हार का सामना करना पड़ा। आपको बता दें कि रायबरेली सीट कांग्रेस का गढ़ है और वर्तमान में सोनिया गांधी यहां से सांसद भी हैं। वहीं दूसरी तरफ मैनपुरी को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव यहां से सांसद हैं। इसके अलावा हैरानी वाली बात ये है कि पिछले तीन दशक से मैनपुरी में सपा ने जिला अध्यक्ष का पद नहीं गंवाया था। साथ ही अमेठी और रायबरेली की सीटों पर इतिहास बना और यहां पहली बार बीजेपी के उम्मीदवार जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीते।
2016 के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में मैनपुरी सीट पर सपा उम्मीदवार जीता था जबकि रायबरेली को तब कांग्रेस ने जीता था। हालांकि रायबरेली से कांग्रेस प्रत्याशी आरती सिंह इस बार भाजपा की रंजना चौधरी से हार गईं। वहीं समाजवादी पार्टी ने रायबरेली में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था।
मैनपुरी के अलावा सपा को इन जिलों में भी लगा झटका
समाजवादी पार्टी के लिए चिंता वाली बात ये है कि सिर्फ मैनपुरी में ही नहीं बल्कि कन्नौज और फिरोजाबाद जैसे अपने गढ़ों में भी पार्टी की हार हुई है। इसके अलावा सपा ने संभल, मुरादाबाद और रामपुर जैसे तीन अहम जिले भी खो दिए हैं। इन जिलों में सपा के मौजूदा सांसद हैं। मैनपुरी से भाजपा की अर्चना भदुरिया ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीता है।












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