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यूपी चुनाव- बुंदेलखंड में "बाबू" बन गया जेंटलमैन

अरे सुनिये हम यूपी शाहरुख खान की मूवी की बात नहीं कर रहे हैं, हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की, जो अगले साल होने वाले हैं। लेकिन और यहां 'बाबू' असल में बाबू सिंह कुशवाहा हैं, जो भले ही किसी पार्टी में नहीं लेकिन भाजपा के लिये जैंटलमैन का किरदार निभाने की तैयारी में हैं। और इस जेंटलमैन का इस्तेमाल बुंदेलखंड के वोट खींचने के लिये किया जायेगा।

अखिलेश ने बुंदेलखंड के लिए पानी लेने से किया मना

दरअसल यूपी में आगामी 2017 में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा ने अपनी तमाम कमजोरियों पर काम करना शुरू कर दिया है। हालांकि सभी दल अपनी कमजोरी के तौर पर बुंदेलखंड की ओर बार-बार झांकने में लगे हैं। जिसे देखकर ये तो साफ है कि 2017 के चुनाव में बुंदेलखंड एक बड़ी भूमिका अदा करने वाला है। अब इसे लेकर भाजपा योजनाओं के पुलिंदे, जनता की सुख सुविधाओं की खातिर किए जाने वाले तमाम प्रयासों की फेहरिस्त तैयार कर रही है तो अन्य दल भी अपने अपने तरीके से जोर लगाने में जुटे हैं। पेश है वन इंडिया की ये रिपोर्ट-

राहुल ने कहा कुछ यूं बनाओ 'माहौल'

2010 में तत्कालीन केंद्र में यूपीए सरकार के दौरान के सात हजार करोड़ की भारी भरकम राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी। 2017 यूपी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पैकेज का संदर्भ देते हुए कार्यकर्ताओं को सपा के खिलाफ उसी तर्ज पर माहौल बनाने को कहा है जैसा कि एनआरएचएम घोटाले के विरोध में बसपा सरकार के खिलाफ तैयार किया गया था। सूखे की हालत से जूझ रहे बुंदेलखंड के पीछे कांग्रेस पैकेज के इस्तेमाल को सही ढ़ंग से न होने को बता रही है। जबकि सूबे के मुखिया अखिलेश यादव सभी विपक्षी पार्टियों को जवाब देने के लिए योजनाओं का पुलिंदा तैयार कर रहे हैं। ताकि उन्हें सही वक्त पर सही जगह थोपा जा सके।

बुंदेलखंड में फेल या पास है 'बीजेपी'

बाबू सिंह कुशवाहा और दद्दू प्रसाद भी बसपा और बुंदेलखंड एक दूसरे के काफी नजदीक रहे हैं। लेकिन ये दोनों ही अब पार्टी से बाहर हैं। बाबू सिंह कुशवाहा अपनी पार्टी (जन अध‍ि‍कार मंच) बना चुके हैं। जो अपने लिये कम भाजपा के लिये ज्यादा काम कर रही है। कहीं न कहीं बाबू सिंह ने बसपा का घिराव करना भी शुरू कर दिया है। जिसकी वजह से ये कहना गलत नहीं होगा कि बसपा का गढ़ माने जाने वाले बुंदेलखंड में माया की सियासत बिखरी हुई है।

19 विधानसभा वाले बुंदेलखंड में बसपा को 2012 के विधानसभा चुनाव में भी अन्य पार्टियों की अपेक्षा ज्यादा सीटें यानि की 7 सीटें मिलीं थीं। जबकि भाजपा को 3 में ही संतोष करना पड़ा था। वहीं लोकसभा चुनावों में 4 में से चारों सीटों पर भाजपा ने बाजी मार ली।

जीत बाया योजनाओं के जरिए

अगर विधानसभावार स्थिति पर गौर किया जाए तो ये संख्या बीजेपी के साथ 18 और सपा के साथ 1 रहा। बसपा और कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। लोकसभा चुनाव के बाद हमीरपुर और चरखारी विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी से दोनों सीटें छीनकर सपा और बसपा 07-07 सीटों पर काबिज हो गईं। हालांकि फिलहाल केंद्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही तमाम योजनाओं को देखकर लोगों ने भाजपा के साथ जुड़ने की कवायद जरूर शुरू की है।

अलग राज्य पर फिर से शुरू हो सकती है सियासत!

09 अप्रैल 2014 को झांसी लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार उमा भारती ने झांसी में एक चुनावी सभा में जो उद्बोधन दिया था कि केंद्र में बीजेपी सरकार बनने के तीन वर्ष के भीतर बुंदेलखंड को एक अलग राज्य बना दिया जाएगा, संभव है कि आगामी चुनावों से पहले अलग राज्य की सियासत करके भाजपा बुंदेलखंड को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास कर सकती है।

वहीं इन सबके इतर राष्ट्रीय आपदा राहत कोष के जरिए 1303 करोड़ की राशि हो या फिर मनरेगा की दिहाड़ी बढ़ाकर 150 रूपये करने के जरिए भाजपा लगातार बुंदेलखंड से सीधे तौर पर जुड़ने की कोशिश कर रही है। ऐसे में बाबू सिंह कुशवाहा के मीठे बोल जनता को अपनी ओर आकर्ष‍ित कर सकती है।

हालांकि भाजपा किसान मोर्चा रामबाबू द्विवेदी द्वारा सपा का विरोध करते हुए कहा कि केंद्र की तमाम योजनाओं पर राज्य सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। वहीं अखिलेश ने बयान दिया था कि केंद्र सरकारों ने बुंदेलखंड को केवल सब्जबाग ही दिखाए हैं। आरोप-प्रत्यारोप के बीच देखना काफी दिलचस्प होगा कि बुंदेलखंड विकास के तमाम दावों के बीच कहां तक की दूरी तय कर पाता है। या फिर से इन वादों के बीच ठगाही होगी बुंदेलखंड के साथ।

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