शहरी युवाओं में लगातार बढ़ रही है बेरोजगारी- सर्वे
नई दिल्ली: सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी लेबर सर्वे के मुताबिक दिसंबर की तिमाही में बेरोजगारी को लेकर बुरी खबर है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश के 10 लाख युवाओं के लिए परेशानी बढ़ाने वाली खबर है जो हर महीने नौकरी की तलाश करते हैं। 15 से 29 साल के शहरी युवाओ में पिछले तीन तिमाहियों में लगातार बेरोजगारी बढ़ी है। दिसंबर तिमाही में ये आंकड़ा 23.7 फीसदी पर पहुंच गया है।

सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा पिछले शुक्रवार को साल 2017-2018 और दिसंबर के तिमाही आंकड़े जारी किए गए। शहरी युवा 11 साल औपचारिक शिक्षा में खर्च करता है, जबकि ग्रामीण युवा इसके लिए 9.3 साल देता है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश में खासकर शहरों में बेरोजगारी की स्थिति चिंताजनक है। पीएलएफएस नाम से इस सर्वे को शुरू करने का मकसद शहरी क्षेत्र में हर तीन महीने में और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्र में हर साल रोजगार की स्थिति जानना था। जो व्यक्ति पिछले सात दिनों में एक घंटे का भी काम ना कर पाया हो और नौकरी तलाश रहा हो तो उसे सीडब्लयूएस के तहत बेरोजगार माना जाता है।
सामान्य तौर पर बेरोजगारी को मापने के लिए सर्वे वाले दिन से पहले के 365 दिनों को रेफरेंस के तौर पर लिया जाता है। श्रम बल की भागेदारी या 15 से 29 साल के युवा जो नौकरी की तलाश कर रहे हैं, 2017-2018 में उनमें 36.9 फीसदी की गिरावट आई है। साल 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक भारत में 33 करोड़ से अधिक लोग युवा हैं. जो 2021 तक बढ़कर 36 करोड़ हो जाएंगे। इस सर्वे से पता चला है कि कामकाजी युवाओं में पुरुषों का औसत वेतन 17,000 से 18,000 वहीं महिलाओं का औसत वेतन 14,000 से 15,000 के बीच रहा।












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