तीन तलाक पर कानून के बाद नाबालिग मुस्लिम बच्चों पर किसका हक, जानिए
नई दिल्ली- मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2019 जैसे ही कानून का शक्ल लेगा, मुस्लिम महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सदियों बाद अचानक बदलाव आ जाएगा। शादी के बंधन में बंधने के बाद जिन अधिकारों के लिए वे तकरीबन 1,400 वर्षों से तरसती और तड़पती रही हैं, अचानक एक झटके में उन्हें वह सब हक मिल जाएगा। आइए हम जानते हैं कि नए कानून में नाबालिग बच्चों के बारे में क्या प्रावधान रखा गया है? साथ ही अगर अब कोई शौहर नियमों के दायरे में रहते हुए बीवी को तलाक देता है तो उसे अपनी पत्नी की क्या-क्या जिम्मेदारियां पूरी करनी पड़ेगी?

तीन तलाक शून्य और गैर-कानूनी हुआ
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) कानून, 2019 के तहत तीन तलाक या इंस्टेंट तलाक किसी भी स्वरूप में अवैध होगा। मसलन पति चाहे बोलकर तीन बार तलाक कहे या लिखकर दे दे या फिर इलेक्ट्रोनिक (फोन,ईमेल,सोशल मीडिया) माध्यम से बीवी को तलाक-तलाक-तलाक कहे, अब उसे शून्य और गैर-कानूनी माना जाएगा। किसी शौहर के तीन बार तलाक कह देने भर से उसकी बीवी पराया नहीं होगी, न ही पत्नी के प्रति उसे जिम्मेदारियों से छुटकारा मिलेगा।

आरोपी के लिए जेल और जुर्माने का प्रावधान
अगर कोई मुस्लिम पुरुष कानून का उल्लंघन करके अब पत्नी को तीन तलाक देगा तो उसे तीन साल तक की सजा भुगतनी पड़ सकती है और जुर्माना भी देना पड़ सकता है। क्योंकि, मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) कानून, 2019 के तहत ट्रिपल तलाक की परंपरा को संज्ञेय अपराध (कॉग्निजेबल ऑफेंस) की श्रेणी में डाल दिया गया है। यानि अब किसी पुलिस स्टेशन का ऑफिसर इंचार्ज विवाहित मुस्लिम महिला या उसके किसी रक्त संबंधी या शादी के बाद बने किसी रिश्तेदार की शिकायत पर आरोपी पति पर आपराधिक धाराओं के तरत केस दर्ज कर सकता है।

बीवी का पक्ष सुने बगैर शौहर को नहीं मिलेगी बेल
नए कानून के तहत आरोपी को तब तक जमानत नहीं मिलेगी, जबतक वह मैजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी नहीं देगा। इसके बाद मैजिस्ट्रेट पहले पीड़ित महिला का पक्ष सुनेगा और दोनों की दलीलें सुनकर संतुष्ट हो जाने के बाद ही बेल मुकर्रर करेगा, अन्यथा आरोपी को जेल में ही रहना होगा।

शौहर को देना होगा बीवी को गुजारा भत्ता
अब अगर कोई मुस्लिम पुरुष बीवी को तलाक देता है तो उसकी बीवी को उससे गुजारा भत्ता मांगने का भी हक होगा। गुजारे भत्ते की यह रकम मैजिस्ट्रेट तय करेगा। यानि अब मुसलमानों को तलाक का फैसला लेने से पहले उसके हर कानूनी और आपराधिक पहलुओं पर सौ बार सोच लेना पड़ेगा।

मां को मिलेगी नाबालिग बच्चों की कस्टडी
अगर नियमों के तहत पति द्वारा पत्नी को दिए गए तलाक पर मैजिस्ट्रेट कानूनी मुहर लगा देता है, तब भी नाबालिग बच्चों की कस्टडी विवाहित मुस्लिम महिला को ही देने का प्रावधान रखा गया है। यानि अगर बच्चे छोटे हैं तो वे मां के पास ही रहेंगे और जब तक वे 18 साल के नहीं हो जाते उनकी निगरानी मां ही करेगी, पिता को उसमें टांग अड़ाने की इजाजत नहीं होगी।
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