Climate Vulnerability Index: यूके की स्टडी ने इंडिया के क्लाइमेट सूचकांक पर उठाए सवाल, जानिए इसके बारे में
Heat Wave: जब किसी क्षेत्र का तापमान औसत का आंकड़ा पार जाता है तब मौसम विभाग वहां पर हीटवेव का अलर्ट जारी करता है। आपको बता दें कि हीटवेव काफी घातक होती हैं।

What is Climate Vulnerability Index: पूरा भारत गर्मी की मार सह रहा है। वैशाख के महीने में जेठ की गर्मी झेल रहे लोगों की मौसम को लेकर चिंता बढ़ गई है तो वहीं एक स्टडी ने लोगों की पेशानी पर बल डाल दिया है। दरअसल कैम्ब्रिज, येल और कैलटेक विवि की ओर से एक अध्ययन प्रकाशित किया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि इंडिया के क्लाइमेट वलनेरेबिलिटी सूचकांक हीटवेव के प्रभाव को ठीक से कैप्चर नहीं कर पाते हैं और हमें इसलिए जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान के बारे में पता नहीं चल पाता है। स्टडी में सीधे तौर पर क्लाइमेट वलनेरेबिलिटी सूचकांक पर सवाल खड़े किए गए हैं।
एसडीजी की प्रगति को नुकसान
स्टडी में कहा गया है कि क्लाइमेट वलनेरेबिलिटी सूचकांक ने पंजाब-हरियाणा को 'लो डेंजर जोन' में रखा है, जबकि यहां पर पिछले साल गर्मी में 6-7 डिग्री तापमान औसत से ज्यादा था। आपको बता दें कि गलत आंकलन से गलत जानकारी प्राप्त होती है।
बहुत ज्यादा नुकसान
मालूम हो कि भारत विश्व के उन देशों में शामिल हैं, जिसे जलवायु परिवर्तन की वजह से बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। तो चलिए विस्तार से जानते हैं कि आखिर क्लाइमेट वलनेरेबिलिटी सूचकांक होता क्या है और ये किस तरह से काम करता है।
क्लाइमेट वलनेरेबिलिटी सूचकांक पर उठे सवाल
गौरतलब है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग , जो कि केंद्र सरकार के अधीन है, देश में National climate vulnerability assessment report जारी करता है, जिससे देश के जलवायु की मौजूदा स्थिति के बारे में पता चल सके और उसके मुताबिक देश में काम हो सके।
ये रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण
इस रिपोर्ट से हम देश के संवेदनशील और अति संवेदनशील क्षेत्रों के च्निहित कर पाते हैं। इसके मुताबिक झारखंड, मिजोरम, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल भारत के जलवायु परिवर्तन के हिसाब से संवेदनशील स्थान हैं।
80 प्रतिशत भारतवासी डेंजर प्लेस में रहते हैं
और 80 प्रतिशत भारतवासी ऐसे जोखिम भरे स्थानों में रहते हैं, जो कि जलवायु परिवर्तन के हिसाब से बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। यहां हीटवेव, बाढ़, चक्रवात का सबसे ज्यादा खतरा है। जबकि इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि दक्षिण भारत को सूखे और पूर्वोत्तर के राज्यों को सबसे ज्यादा बाढ़ का खतरा है। इस रिपोर्ट के ही मद्देदनजर चिन्हित स्थानों पर निवेश और व्यवस्था की जाती है। लेकिन यूके की स्टडी ने इस सूचकांक पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल भारत की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है।
हीटवेव ने हाहाकार मचाया
से इसमें कोई शक नहीं कि इस पूरे पूरे भारत में हीटवेव ने हाहाकार मचाया हुआ है। आज भी बिहार, बंगाल, हरियाण, पंजाब में हीटवेव का अलर्ट जारी है इसलिए लोगों को सेहत के प्रति सतर्क रहने को कहा गया है। तो वहीं दो दिन बाद फिर से दिल्ली, राजस्थान, एमपी के मौसम में बदलाव होगा और गर्म हवाओं से लोगों को दो चार होना पड़ेगा। फिलहाल मौसम विभाग ने अपील की है कि सभी लोग घर से बाहर निकलते वक्त बताई गई गाइडलाइंस का पालन करें क्योंकि जरा सी लापरवाही आपको गंभीर रूप से बीमार कर सकती है।
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