Turkey Earthquake: एक भारतीय लापता, भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में फंसे 10 भारतीयों का अपडेट जानिए
तुर्की में भूकंप के बाद से एक भारतीय का पता नहीं चल रहा है। 10 भारतीय प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हैं, लेकिन सुरक्षित बताए जा रहे हैं। भारत, तुर्की और सीरिया दोनों देशों में ऑपरेशन दोस्त चला रहा है।

तुर्की और सीरिया में राहत और बचाव का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इस अभियान में भारत भी ऑपरेशन दोस्त के माध्यम से दोनों ही देशों की मदद करने में जुटा हुआ है। हालांकि, केंद्र सरकार ने कहा है कि तुर्की में अभी तक एक भारतीय के लापता होने की जानकारी है, जिससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। 10 भारतीय वहां के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए हैं, लेकिन वह पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इस बीच भारत ऑपरेशन दोस्त के तहत उन दोनों देशों की जी-जान से सहायता करने की कोशिश कर रहा है और इसके लिए जी20 के मंत्र 'एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य' को अपनाया गया है।

'तुर्की में एक भारतीय लापता, 10 फंसे हैं लेकिन सुरक्षित हैं'
केंद्र सरकार ने बुधवार को जानकारी दी है कि तुर्की में वर्क विजिट पर गया एक भारतीय भयंकर भूकंप के बाद से लापता है। वहां भयंकर भूकंप में मरने वालों की संख्या 8,500 से ज्यादा हो चुकी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि तुर्की में इस समय 3,000 भारतीय हैं, जिनमें से 10 वहां के दूर-दराज हिस्सों में फंसे हैं, लेकिन सुरक्षित हैं। विदेश मंत्रालय में सचिव, पश्चिम, संजय वर्मा ने कहा है कि 'हमने तुर्की के अदाना में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया है। 10 भारतीय प्रभावित इलाकों के दूर-दराज इलाकों में फंसे हुए हैं, लेकिन सुरक्षित हैं। एक भारतीय जो वहां पर कारोबार के सिलसिले में गए हुए थे, वे लापता हैं। हम उनके परिवार वालों और बेंगलुरु की जिस कंपनी में वे कार्यरत हैं उसके साथ संपर्क में हैं। '

भारत ने ऑपरेशन दोस्त लॉन्च किया है
इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत ऑपरेशन दोस्त के तहत राहत सामग्री, मेडिकल सप्लाई और उपकरण के अलावा सर्च और रेस्क्यू टीम तुर्की और सीरिया दोनों मुल्कों तक पहुंचा रहा है। इस बीच तुर्की और सीरिया दोनों जगहों पर जीवित बचे लोगों की तलाशी का काम लगातार जारी है। दोनों देशों को मिलाकर इस प्राकृतिक आपदा में 11,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। उन्होंने ट्वीट किया, 'ऑपरेशन दोस्त के तहत भारत तुर्की और सीरिया में सर्च और रेस्क्यू टीम, एक फिल्ड हॉस्पिटल, सामग्री, दवाएं और उपकरण भेज रहा है। यह ऑपरेशन चल रहा है और हम अपडेट पोस्ट करते रहेंगे।'

भारत ने ऐसे बढ़ाया मदद का हाथ
उधर एनडीआरएफ के डायरेक्टर जनरल अतुल करवाल ने कहा है, 'पहली टीम ने अदाना एयरपोर्ट पर लैंड किया और दूसरी टीम को उर्फा डायवर्ड कर दिया गया, क्योंकि अदाना में भीड़ थी। दोनों ही नुर्डागी में एकत्रित हो रही हैं, जो कि गाजियानटेप प्रांत में है, जो कि सबसे बुरी तरह से प्रभावित क्षेत्रों में से एक है।' उनके मुताबिक 'पहली टीम कल 3 बजे रवाना हुआ थी और 11 बजे लैंड कर गई। दूसरी ने 8 बजे शाम को लैंड किया। कुल 7 वाहन, 5 महिला बचावकर्मियों समेत 101 बचावकर्मी और 4 स्निपर डॉग्स भी इसमें शामिल हैं। इन टीमों ने पहले ही ऑपरेशन शुरू कर दिया है।'
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'एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य' के मंत्र का पालन कर रहे-भारत
उधर विदेश मंत्रालय में पश्चिम के सचिव संजय वर्मा ने सीरिया पर अमेरिकी प्रतिबंधों का मानवीय सहायता पर असर को लेकर कहा है कि 'हम जी 20 के 'एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य' के मंत्र का पालन कर रहे हैं। इस तरह की मानवीय सहायता पर प्रतिबंध लागू नहीं होते। हमने सीरिया में 6 टन मेडिकल सहायता भेजी हैं।' इस बीच राहत और बचावकर्मियों ने बुधवार को भी जीवितों को खोजना का काम जारी रखा है, हालांकि उम्मीदों का दायरा अब सिमटता जा रहा है।
मुश्किल है चुनौती, लेकिन डटे हैं बचावकर्मी
7.8 की तीव्रता वाले प्रलयकारी भूकंप के बाद लगातार हजारों खोजी लोग दिन-रात जीवितों की तलाश में जुटे हुए हैं। जमा देने वाले तापमान में भी वह मलबे से लोगों को किसी तरह से सुरक्षित निकालने का भरोसा कायम रखे हुए हैं और उन्हें सफलता मिली भी है। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की के रेड क्रिसेंट चीफ केरेम किनिक ने चेतावनी दी थी कि बचाव की कोशिशों के लिए पहले 72 घंटे बहुत ही महत्वपूर्ण होंगे, लेकिन सारे प्रयास मौसम की विपरीत परिस्थितियों में करने हैं। बुधवार को बचावकर्मियों ने गिरी हुई इमारतों के मलबों से कुछ बच्चों को सुरक्षित निकालने में भी सफलता पाई है।












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