23,000 भारतीय स्टूडेंट पर आफत, App के जरिए चीन निकाल रहा है खुन्नस

दिल्ली, 21 जुलाई: भारत ने चाइनीज ऐप पर पाबंदी लगाया था, लगता है कि चीन उसका बदला वहां पढ़ रहे भारतीय स्टूडेंट से निकालना चाहता है। अभी इन भारतीय स्टूडेंट को कोविड महामारी के चलते चीन जाने की इजाजत भी नहीं दी जा रही है, ऊपर से उनसे कहा जा रहा है कि ऑनलाइन क्लास उन्हीं ऐप पर अटेंड करें जिसपर पाबंदी लग चुकी है। अपने स्तर पर ये स्टूडेंट भारत और चीन दोनों ओर के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। अब इसमें उनकी मदद के लिए गुजरात के वाणिज्यिक संगठन भी आ गए हैं। बता दें कि लद्दाख की गलवान घाटी में चीन की सेना की हरकत के बाद भारत ने करीब 250 चाइनीज ऐप पर सुरक्षा वजहों से बैन कर दिया था।

ड्रैगन के चलते मुसीबत में 23,000 भारतीय स्टूडेंट

ड्रैगन के चलते मुसीबत में 23,000 भारतीय स्टूडेंट

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे तकरीबन 23,000 भारतीय स्टूडेंट अभी ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मजबूर हैं। इनमें से 20,000 तो सिर्फ मेडिकल स्टूडेंट हैं, जिनका दाखिला चीन के कई विश्वविद्यालयों में हो रखा है। अब इनके सामने बड़ी मुसीबत ये आ रही है कि उनपर ऐसे ऐप डाउनलोड करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिनपर भारत सरकार ने पाबंदी लगा दी है। भारत ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर उसकी हरकतों के चलते करीब 250 चाइनीज ऐप पर बैन लगाया है, क्योंकि सरकार के मुताबिक ये ऐप देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे थे। लेकिन, अब इसका खामियाजा वहां दाखिला ले चुके भारतीय छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

वीपीएन के जरिए कुछ अटेंड कर रहे हैं क्लास

वीपीएन के जरिए कुछ अटेंड कर रहे हैं क्लास

भारतीय स्टूडेंट का आरोप है कि अब चाइनीज यूनिवर्सिटी उनसे कह रहे हैं कि अगर वो अपनी स्टीज जारी रखना चाहते हैं तो वे बैन लगे हुए ऐप को ही डाउनलोन करें। ऑनलाइन क्लास के लिए ज्यादातर चाइनीज यूनिवर्सिटी वीचैट, डिंगटॉक, सुपरस्टार और टेनसेंट जैसे वीडियो चैट ऐप का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने भारतीय छात्रों से कह दिया है कि किसी भी तरह से मैनेज करके इन ऐप्स का इस्तेमाल करें। ये छात्र-छात्राएं इंडियन स्टूडेंट्स इन चाइना (आईएससी) के सदस्य हैं और चीन और भारत के अधिकारियों के सामने यह मसला उठा चुके हैं। फिलहाल ये स्टूडेंट वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) के जरिए इन्हें ऐक्सेस करके अपना क्लास अटेंड कर रहे हैं। दिल्ली के रहने वाले एक छात्र शाहरूख खान जो सूचावॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं, उन्होंने कहा है, 'पहले हमारा ऑनलाइन क्लास वीचैट ऐप पर होता था। लेकिन, जब भारत सरकार ने उसपर बैन लगा दिया तो हमारे यूनिवर्सिटी ने दूसरे चाइनीज प्लेटफॉर्म डिंगटॉक का उपयोग करने लगा....लेकिन यह भी बैन हो गया।'

ट्यूशन फीस के नाम पर मोटी रकम भर रहे हैं स्टूडेंट

ट्यूशन फीस के नाम पर मोटी रकम भर रहे हैं स्टूडेंट

दिक्कत ये है कि चीन ने स्टूडेंट के वहां जाने पर अभी भी पाबंदी लगा रखी है। जबकि ये स्टूडेंट ट्यूशन फीस के तौर पर 3 लाख रुपये से लेकर 4.5 लाख रुपये तक सालाना भुगतान करते हैं। वडोदरा में रहने वाले एक छात्र जो कि आईएससी के नेशनल कोऑर्डिनेटर भी है, उनका कहना है- 'नेटवर्क इश्यू के चलते हम अपना लेक्चर नहीं अटेंड कर सकते और इसके चलते पढ़ाई में बहुत ही ज्यादा दिक्कत होती है। कई बार तो यह इतना ज्यादा बाधित होता है कि हम बेसिक बातें भी नहीं समझ पाते।' हर्बिन मेडिकल यूनिवर्सिटी से हाल ही में एमबीबीएस सेकंड ईयर पूरा करने वाले जयपुर के निरमत सिंह अभी नेशनल एग्जिट टेस्ट की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें भारत में प्रैक्टिस करना है तो विदेशी छात्रों के लिए यह परीक्षा अनिवार्य है। वो कहते हैं, 'मुझे नहीं पता कि मैं रेगुलर क्लास कब अटेंड कर पाऊंगा। हमें ऑनलाइन क्लास अटेंड करने में भी बहुत दिक्कत होती है। हमारी यूनिवर्सिटी टेनसेंट ऐप पर क्लास लेती है, जो कि भारत में बैन है।' (इस स्टोरी में स्टूडेंट के नाम उनकी पहचान छिपाने के लिए बदल दिए गए हैं।)

स्टूडेंट की मदद के लिए आगे आए कुछ संगठन

स्टूडेंट की मदद के लिए आगे आए कुछ संगठन

भारत में कई संगठन स्टूडेंट के इस मुद्दे को अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। मनीष कपाड़िया, जो कि साउदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य हैं, उनका कहना है, 'गुजरात के स्टूडेंट की ओर से इनके मुद्दों को उठाने के लिए मैं और कुछ और लोग केंद्रीय मंत्री के साथ मीटिंग अरेंज करने की कोशिश कर रहे हैं।' (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

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