सरकारी स्‍कूल में पढ़ी हैं IAS टॉपर नंदिनी केआर, दोस्‍त मजाक में कहते थे टॉप करने की बात

पीडब्ल्यूडी में काम करते हुए ही उन्होंने ज़मीनी स्तर पर सरकार का कामकाज देखा। वो कहती हैं, "तब ही मैंने सोचा कि मैं आईएएस अफ़सर बनकर समाज के लिए बेहतर काम कर सकती हूं।"

नई दिल्‍ली। पिछले एक सप्ताह से नंदिनी केआर अपने दोस्तों के मज़ाक के निशाने पर थीं। उन्हें बार-बार चिढ़ाया जा रहा था कि इस बार की सिविल सेवा परीक्षा को वो ही टॉप करेंगी। लेकिन जो बात उनके दोस्त मज़ाक में कह रहे थे वो अब सच साबित हो गई है। जब सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे आए तो उन पर यक़ीन करना नंदिनी के लिए मुश्किल था।

सरकारी स्‍कूल में पढ़ी हैं IAS टॉपर नंदिनी केआर, दोस्‍त मजाक में कहते थे टॉप करने की बात

नंदिनी इस समय फ़रीदाबाद में भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी के तौर पर काम कर रही हैं। जब बीबीसी ने उन्हें फ़ोन किया तो पीछे पत्रकारों का शोर था। उन्होंने बीबीसी से कहा, "जब नतीजे आए तो मैं उन पर यक़ीन ही नहीं कर पाई।" लेकिन बेंगलुरू के एमएस रमैय्या इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी की सिविल इंजीनियरिंग की छात्रा रहीं नंदिनी के आईएएस अधिकारी बनने में ख़ास बात क्या है?

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वो कहती हैं, "आईएएस बनना हमेशा से मेरा सपना था। अगर आप समाज का विकास करना चाहते हैं तो आप आईएएस बनकर ये बेहतर तरीके से कर सकते हैं।" कर्नाटक के कोलार ज़िले के एक शिक्षक की बेटी नंदिनी ने शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की है। बारहवीं की पढ़ाई के लिए वो चिकमंगलूर ज़िले के मूदाबिदरी आईं और परीक्षा में 94.83 प्रतिशत अंक प्राप्त किया।

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उन्होंने एमएस रमैय्या इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग करने के बाद तुरंत कर्नाटक के पीडब्ल्यूडी विभाग में नौकरी कर ली।पीडब्ल्यूडी में काम करते हुए ही उन्होंने ज़मीनी स्तर पर सरकार का कामकाज देखा। वो कहती हैं, "तब ही मैंने सोचा कि मैं आईएएस अफ़सर बनकर समाज के लिए बेहतर काम कर सकती हूं।"

अपने पहले प्रयास में उन्होंने 642वीं रैंक हासिल की और दिसंबर 2015 में आईआरएस सेवा ज्वाइन कर ली। इसकी ट्रेनिंग के दौरान ही नंदिनी ने दिल्ली में एक कोचिंग संस्थान के साथ जुड़कर तैयारी करने का निर्णय लिया। पीडब्ल्यूडी में दो साल और आईआरएस में एक साल का अनुभव रखने वाली नंदिनी कहती हैं कि हमारा बुनियादी उसूल होना चाहिए, "हम जहां भी हों अपना सर्वश्रेष्ठ दें।"

दो साल राज्य और एक साल केंद्र में नौकरी के बाद क्या उनकी प्रशासकों के बार में राय बदली है? नंदिनी कहती हैं, "काम पर अलग-अलग चुनौतियां होती हैं। लेकिन प्रशासन में बहुत कुछ सकारात्मक होता है। काम करने के बेहतर अवसर होते हैं। हम निश्चित तौर पर विकास में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।"

नंदिनी कहती हैं, "एक आदर्श प्रशासक यदि इरादे का पक्का हो, अपने काम के प्रति समर्पित हो और चुनौतियां स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहे तो वो समाज के लिए बहुत कुछ कर सकता है।" नंदिनी अपने जिस दृढ़ संकल्प से शीर्ष तक पहुंची हैं और अपने दोस्तों की उम्मीदों पर खरी उतरी हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि उनके लिए आदर्श प्रशासक बनना बहुत मुश्किल नहीं होगा।

इंजीनियर होने के बावजूद नंदिनी ने कन्नड़ साहित्य को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था। वो ओबीसी कैटेगरी से आती हैं। साल 2016 की सिविल सेवा परीक्षा में 1099 उम्मीदवार सफल हुए हैं। अनमोल शेरसिंह बेदी दूसरे स्थान पर आए हैं जबकि गोपालकृष्ण रोनांकी को तीसरा स्थान हासिल हुआ है।

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