Tokyo Olympics: नीरज चोपड़ा को गोल्ड मिलने पर क्यों बोले लद्दाख के भाजपा सांसद-शायद कृपा वहीं अटकी हुई थी
नई दिल्ली, 8 अगस्त: टोक्यो ओलंपिक में भारत को पहला गोल्ड दिलाने वाले स्टार जैवलिन थ्रो एथलीट नीरज चोपड़ा पर पूरा देश फक्र कर रहा है। इसबार के ओलंपिक में उन्होंने देश के लिए जो करिश्मा कर दिखाया है, उसकी जितनी भी तारीफ की जाए उसके शब्द कम पड़ जाएंगे। लेकिन, इस मौके पर भी राजनीतिक तंजबाजी कम नहीं हो रही है और लोग अपने-अपने अंदाज में सियासी टीका-टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्हीं में से एक हैं लद्दाख के लोकप्रिय और चर्चित बीजेपी सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल, जिन्होंने एक टीवी वाले बाबा का तकिया कलाम का इस्तेमाल कर ट्यूटर यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की है। उन्होंने नीरज चोपड़ा की ऐतिहासिक सफलता को एक दिन पहले खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदले जाने से जोड़ा है और लिखा है- शायद कृपा वहीं अटकी हुई थी।

बच्चे इसे फ्यूचर बनाएं तो बहुत अच्छी बात होगी- नीरज चोपड़ा
ओलंपिक गेम में गोल्ड मेडल लाकर नीरज चोपड़ा ने 139 करोड़ भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा किया है। लेकिन, वे मानते हैं वो इस मेडल को तब और बड़ा मानेंगे जब इसके चलते और बच्चे एथलेटिक्स में आएं और देश के लिए मेडल जीतकर लाएं। एक टीवी चैनल से बातचीत में नीरज अपनी सफलता के पीछे का एक बहुत बड़ा राज खोला है। उन्होंने कहा है, "मेरी कोशिश रहती है कि जबतक कॉम्पिटिशन फाइनल न हो जाए, मैं थ्रो पर ही अपनी फोकस रखूं....क्योंकि कुछ भी हो सकता है कॉम्पिटिशन में...कुछ नहीं पता लगता। मेरा पूरा फोकस इसी पर था कि अपने थ्रो अच्छे करने हैं...." यही नहीं, उनका तो यहां तक कहना है कि यह मेडल तब और बड़ा स्थान रखेगा जब इसके चलते नई पीढ़ी के बच्चे खेलों की ओर रुख करें। उन्होंने कहा है- "मैं तब इस मेडल को और बड़ा मानूंगा जब इस मेडल की वजह से बच्चे गेम में आ सकें और अपना फ्यूचर बना सकें तो बहुत अच्छी बात होगी; और अपने देश के लिए बहुत अच्छी बात होगी कि और अच्छे एथलीट निकलकर आएं।"
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शायद कृपा वहीं अटकी हुई थी- भाजपा सांसद
लेकिन, एक तरफ नीरज चोपड़ा ने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है, वहीं उनकी कामयाबी पर देश में सियासी चटकारे भी जमकल लिए जा रहे हैं। नीरज की सफलता के ठीक एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे बड़े खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर हॉकी के जादूगर रहे मेजर ध्यानचंद के नाम पर कर दिया था। इसके एक दिन बाद जैसे ही नीरज चोपड़ा ने भाला फेंकने में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता, लद्दाख से बीजेपी के एमपी जामयांग सेरिंग नामग्याल ने ट्विटर पर लिखा- 'बधाई हो ! खेल रत्न का नाम बदलते ही देश को गोल्ड मेडल मिल गया। शायद कृपा वहीं अटकी हुई थी।' जाहिर है कि उनका तंज पुरस्कार के पुराने वाले नाम को लेकर था।

पीएम मोदी ने बदला है खेल रत्न पुरस्कार का नाम
एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलने का ऐलान करते हुए ट्विटर पर लिखा था- "देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए। लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है। जय हिंद!" पीएम मोदी के इस फैसले को जहां व्यापक रूप से समर्थन किया गया, वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पूर्व पीएम राजीव गांधी का नाम हटाए जाने पर जमकर भड़ास भी निकाली। अलबत्ता कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल पूछने पर भी चुप्पी साधे रखने में ही भलाई समझी।

दूसरे प्रतियोगी का भी हौसला बढ़ाना चाहिए- नीरज चोपड़ा
दरअसल, शनिवार को पुरुषों की भाला फेंक फाइनल में एक जबरदस्त कोशिश के साथ नीरज चोपड़ा ने तब इतिहास रच दिया, जब उनके 87.58 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास ने भारत को ओलंपिक खेलों में एथलेटिक्स में अपना पहला स्वर्ण पदक जीतने में मदद की। 23 साल के इस स्टार एथलीट ने फाइनल में ऐसा प्रदर्शन किया कि उनके 11 अन्य प्रतियोगी उनके दूसरे सवर्श्रेष्ठ थ्रो 87.03 के भी करीब नहीं आ सके। लेकिन, बावजूद इसके नीरज में खेल भावना इस कदर कूट-कूट कर भरी है कि राजनीतिक तंज से उलट वे दूसरे प्रतियोगियों को भी कमतर नहीं आंकते और सबका हौसला बढ़ाते रहे हैं। उन्होंने कहा भी है कि "दूसरे प्रतियोगी का भी हौसला बढ़ाना चाहिए, चाहे वे दूसरे देश के ही हैं।" अब नीरज का पूरा फोकस सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप पर रहने वाला है।












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