कोलकाता कांड की लड़ाई TMC ने की दिल्ली में लड़ने की तैयारी, पूछा- संदीप घोष अबतक क्यों नहीं हुए गिरफ्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रमुख नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भारत में बलात्कार विरोधी कानूनों को और सख्त बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो वह लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश करेंगे।
टीएमसी छात्र इकाई की ओर से अपने स्थापना दिवस पर आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने बलात्कार के मामलों में त्वरित सुनवाई और सजा की आवश्यकता पर जोर दिया।

बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर वे लॉकडाउन या नोटबंदी जैसे उपाय तेजी से लागू कर सकते हैं, तो उन्हें बलात्कार विरोधी कड़े कानून भी लागू करने चाहिए। उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के मामले की चर्चा की, जिसके साथ बलात्कार हुआ और उसकी हत्या कर दी गई थी।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जवाबदेही की मांग
टीएमसी नेता ने पश्चिम बंगाल में चल रही जांच के सीबीआई के तरीके पर असंतोष जताया। उन्होंने बताया कि 13 अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय की ओर से मामला सौंपे जाने के बावजूद सीबीआई ने कोई खास प्रगति नहीं की है। बनर्जी ने सवाल उठाया कि 9 अगस्त की घटना के दौरान आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संदीप घोष को कई बार पूछताछ के लिए बुलाने के बावजूद गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।
बनर्जी ने 2004 में रवींद्रनाथ टैगोर के चोरी हुए नोबेल पदक को बरामद करने में उनकी विफलता जैसी पिछली सीबीआई जांच की भी आलोचना की। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा का सहारा लेने का आरोप लगाया और दावा किया कि बंगाल में लोगों ने भाजपा के बंद के आह्वान को खारिज कर दिया है।
दूसरे राज्यों में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए बनर्जी ने सवाल किया कि क्या बंगाल को भाजपा नेताओं से महिला सुरक्षा पर सबक लेने की जरूरत है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के उन्नाव और हाथरस जैसी जगहों पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, 'जो लोग ममता बनर्जी का इस्तीफा मांग रहे हैं, उन्हें योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा मांगना चाहिए।'
रैली में अपने भाषण के दौरान बनर्जी ने दोहराया, 'हमारी एकमात्र मांग बलात्कार विरोधी सख्त कानून है।' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने आवश्यक कदम नहीं उठाए, तो वे दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे और बलात्कार के मामलों में समय पर सुनवाई और सजा सुनिश्चित करने के लिए नए कानून बनाने के लिए दबाव डालेंगे।












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