'हिंदुओं की आस्था को गहरा आघात', तिरुपति लड्डू विवाद पर श्री श्री ने दी खास सलाह
जिस तरह से तिरुपति स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर में प्रसाद को लेकर विवाद हो रहा है उसके बाद श्री श्री रविशंकर ने भी खुलकर इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि मंदिर के प्रबंधन से सरकारों और उद्योगपियों को दूर रहना चाहिए। बता दें कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम जोकि मंदिर का प्रबंधन देखती है, उसने इन आरोपों की पुष्टि की है कि मंदिर में सप्लाई होने वाले घी में मिलावट थी।
हालांकि आरोपों में घिरे एआर डेयरी फूड प्राइवेट लिमिटेड के एक अधिकारी ने इन दावों को निराधार बताया है। तमिलनाडु स्थित इस कंपनी पर आरोप लगने के बाद कि घी में मछली का तेल मिलाया गया था। जिसके बाद टीटीडी ने इस पर कानूनी जांच शुरू कर दी है।

इस मामले पर श्री श्री ने कहा कि तिरुपति लड्डू विवाद ने हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों को गहरा आघात पहुंचाया है। अब समय आ गया है कि मंदिर के प्रबंधन को नजरअंदाज ना किया जाए, इसे धार्मिक लीडर्स और भक्तों के हाथ में सौंपा जाए नाकि खुद से सेवा देने वाले अधिकारी, नेताओं और उद्योगपतियों को यह काम दिया जाए।
सभी घी की हो जांच
इसके साथ ही श्री श्री रविशंकर ने बाजार में उपलब्ध घी सहित सभी खाद्य उत्पादों की व्यापक जांच की वकालत की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे किसी भी प्रकार की मांसाहारी मिलावट के बिना शाकाहार का पालन करने वालों को इस तरह के उत्पाद का इस्तेमाल ना करना पड़े। उन्होंने खाद्य पदार्थों में मिलावट के दोषी पाए जाने वालों के लिए कठोर दंड की मांग की है।
मंदिर की अखंडता अहम
श्री श्री ने दक्षिण भारत के संतों, स्वामियों और आध्यात्मिक नेताओं की एक समिति बनाने का सुझाव दिया, जिसमें सरकारी प्रतिनिधियों को सिर्फ एक छोटी भूमिका सौंपी जाए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि प्रसाद की तैयारी सहित मंदिर के सभी मामले धार्मिक मानदंडों के अनुरूप हों और मंदिर की आध्यात्मिक अखंडता बनी रहे।
लोगों में आक्रोश
गौर करने वाली बात है कि तिरुपति मंदिर में मिलावट कांड ने न केवल लोगों में आक्रोश पैदा किया है, बल्कि धार्मिक प्रसाद तैयार करने और प्रबंधित करने के तरीके में व्यवस्थागत बदलाव की मांग भी की है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अलग-अलग सुझाव दिए जा रहे हैं।












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