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मुंबई के जंगलों में सांपों की सबसे बड़ी दोस्त हैं ये महिलाएं

सांपों को पकड़ना हमेशा से ही मुश्किल काम रहा है और इस काम में पुरुषों को महारत हासिल है, लेकिन मुबई के जंगलों में महिलाओं का है बोलबाला

मुंबई। जिस काम में आपने महारत हासिल कर रखी हो और आपको भरोसा है कि आप इस काम को बेहतर करते हैं तो आपको उस काम को करने में काफी अच्छा लगता है। सांपों की दुनिया को बहुत ही खौफ से देखा जाता है और माना जाता है कि सांपों को पकड़ने का काम मुख्य रूप से पुरुषों का काम है। लेकिन मुंबई में कई ऐसी महिलाएं हैं जो इस भ्रम को तोड़ रही हैं। मुंबई में सांपों का इंसानों के साथ आए दिन टकराव होता रहता है, ऐसे में कई ऐसी महिलाओं ने इसका बीड़ा उठाया और इन सांपों की मदद का जिम्मा लिया।

फैक्ट्री में अकेले के दम पर पकड़ा सांप

फैक्ट्री में अकेले के दम पर पकड़ा सांप

सांपो को पकड़ने में एक्सपर्ट वैशाली चव्हाण जिन्हें जहरीले सापों को मुंबई के पकड़ने में महारत हासिल है, वह जब बोइसर में एक फैक्ट्री में सांप पकड़ने पहुंची तो उन्हें देखकर वहां काम कर रहे पुरुषों को यकीन नहीं हो रहा था। वैशाली के पास अजगर, रसेल वाइपर, कोबरा जैसे सांपों को पकड़ने का पांच साल का अनुभव है।

वैशाली जब फैक्ट्री में सांप को पकड़ने पहुंची तो यहां रखी बड़ी-बड़ी मोटर को हिलाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, उन्होंने इसके लिए जब फैक्ट्री में काम कर रहे लेबर से मदद करने को कहा तो डर की वजह से इन लोगों ने मदद से इनकार कर दिया, वर्करों के अंदर सांप का खौफ कुछ इस कदर था कि इन लोगों ने वैशाली से कहा कि हम पास नहीं जाएंगे।

मिथक को तोड़ा

मिथक को तोड़ा

जब वैशाली पहली बार अपनी बेटी के स्कूल में सांप को पकड़ने पहुंची थी तो उनका अनुभव बेहद ही अलग था, इस वक्त वह सांप पकड़ने वाले के सहयोगी के तौर पर काम कर रही थीं, उस वक्त उन्होंने उनसे कहा था कि आप कांच का जार पकड़िए, क्योंकि आप एक महिला हैं और आप तो काकरोच देखकर भी चीख देती हैं, लेकिन समय के साथ वैशाली ने खुद को साबित किया और कई जहरीले सांपों को पकड़ने में सफलता हासिल की थी। वैशाली चव्हाण का कहना है कि अब समय काफी बदल रहा है, मेरी बेटी जोकि सिर्फ 13 साल की है, एक बार उसके स्कूल में जब लड़के कीट को मारने की कोशिश कर रहे थे तो वह उसे बचाने के लिए अपने स्कूल के बैग में रखकर घर ले आई।

मानसी नथवानी हर रोज 5 सांप पकड़ती हैं

मानसी नथवानी हर रोज 5 सांप पकड़ती हैं

मुंबई के जंगल में इंसानों और जानवरों के बीच आए दिन टकराव होता है, ऐसें में यहां सांपों को पकड़ने वाले जरूरत काफी ज्यादा होती है। लेकिन इन परिस्थितियों में कुछ दिलेर महिलाओं ने इसका जिम्मा उठाया जिसमें से एक थीं वैशाली, जो लोगों के घरों में सांप को पकड़ने में मदद करती थीं। वैशाली की तर्ज पर मानसी नथवानी भी थाने में सांप पकड़ने वाली महिला के तौर पर सक्रिय थी और वह हर रोज तकरीबन 7 से 8 कॉल रीसीव करती थी। पिछले मानसून में उन्होंने पांच कोबरा सांप पकड़े थे

जिस सांप ने पिता को काटा उसे ही बचाने पहुंची गार्गी

जिस सांप ने पिता को काटा उसे ही बचाने पहुंची गार्गी

गार्गी विजयराघवन की कहानी भी काफी अलग है, गार्गी बचपन में सांप को बचाने का काम करना शुरु करना चाहती थी और बाद में उन्होंने इसे ही अपना कैरियर बनाया, वह बार्क कालोनी में सांप पकड़ने का काम करती हैं। विजयवर्गीज के पहले सांप को बचाने की कहानी काफी अलग है, उनके पिता को एक कोबरा ने उस वक्त काट लिया था जब वह उसे अपनी मच्छरदानी से हटाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन एक तरफ जहां गार्गी के पिता आईसीयू में भर्ती थे तो दूसरी तरफ गार्गी उस सांप को बचाने के लिए वापस घर पहुंच गई। गार्गी का कहना है कि लोग यह देखकर यकीन नहीं कर पा रहे थे कि मैं उसी सांप की मदद क्यूं कर रही हूं जिसने मेरे पिता को काटा है, लेकिन मैंने सांप को निकालने में मदद की क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि वह परेशान होता रहे।

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