ICMR का दावा, भारत में कोरोना वायरस के तीन स्ट्रेन में कोई म्यूटेशन नहीं
नई दिल्ली। भारत सहित पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ रही है। देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 14 हजार से अधिक पहुंच चुकी है। इस वायरस का वैक्सीन नहीं बन पाने के कारण भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस दिशा में दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं और वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटे हैं। वहीं, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) का कहना है कि वैज्ञानिकों के पास उपलब्ध साक्ष्य से पता चला है कि कोरोना वायरस के तीन स्ट्रेन्स में म्यूटेशन नहीं हो रहा है, जो देश में संक्रमण के लिए जिम्मेदार हैं।

कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया लॉकडाउन बढ़ने के बाद से औसतन 6.2 दिन में कोरोना मामलों की संख्या देश में दोगुनी हो रही है, जो कि पहले तीन दिन में दोगुनी हो रही थी। इस तरह से लॉकडाउन बढ़ने के कारण वायरस के प्रसार में कुछ हद तक कमी आई है। वहीं, ICMR में कम्युनिकेशन बीमारियों के प्रमुख डॉ. आर गंगाखेड़कर ने बताया कि पहला वायरस सीक्वेंस वुहान से मिले सैंपल की तरह ही है।
पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में भी Sars-CoV-2 पर प्रयोग चल रहा है और यहां पाया गया है कि संक्रमण फैलाने वाले पैथोजन के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। डॉ. आर गंगाखेड़कर ने कहा कि ईरान में पाया गया स्ट्रेन भी पहले वाले स्ट्रेन से मिलता-जुलता है और तीसरा स्ट्रेन जो यूएएस और यूके में संक्रमित मरीजों में पाया गया, म्यूटेट नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि अब ये समझना होगा कि भारत में कोरोना वायरस का कौन सा स्ट्रेन सबसे तेजी से संक्रमण फैलने के लिए जिम्मेदार है। डॉ. गंगाखेड़कर ने कहा कि फिलहाल, ये बताना मुश्किल है लेकिन इसको समझने के लिए मरीजों से वायरस स्ट्रेन लिए जाएंगे। फिलहाल, तीन तरह के वायरस स्ट्रेन दिखाई दिए हैं और इनको ए, बी और सी स्ट्रेन नाम दिया गया है। पहला स्ट्रेन जीनोम सीक्वेंस था जो चीन के वुहान में फैला था, दूसरा स्ट्रेन पूर्वी एशिया के देशों के संक्रमित मरीजों में दिखाई दिया जबकि तीसरा स्ट्रेन यूरोप के देशों में नजर आ रहा है।












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