कश्मीर में पुलिस को दिए गए आतंकियों से नरमी बरतने के निर्देश!
श्रीनगर। आठ जुलाई से कश्मीर में जारी तनाव में कोई कमी नहीं आई है और अगर ऐसे में जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों का मनोबल गिरा हो और उनमें निराशा का माहौल हो तो स्थिति की गंभीरत सोचने पर मजबूर सकती है। लोगों का ध्यान आतंकियों की मौत और उनकी वजहों पर तो जा रहा है लेकिन इस बात का जिक्र कोई नहीं कर रहा है कि पिछले एक माह से पुलिस और इसके जवानों की क्या हालत है।

परिवारवाले और दोस्त आतंकियों का निशाना
घाटी के पुलिस ऑफिसर्स और जवानों के परिवारवालों और उनके दोस्तों को आतंकी निशाना बना रहे हैं। घाटी के एक पुलिस ऑफिसर ने बताया कि जो आतंकी पुलिसवालों को निशाना बनाता है उनके लिए एक तरह की हमदर्दी देखी जाती है। इस माहौल ने आतंकियों को और हिम्मत दी है और वे पुलिस वालों पर हमले करने से भी नहीं चूक रहे हैं।
खत्म हुआ थ्री ग्रिड सिक्योरिटी सिस्टम
एक माह में घाटी में विरोध प्रदर्शनों और अशांति का माहौल बना हुआ लेकिन इसके बीच ही थ्री टियर सिक्योरिटी सिस्टम को हटा लिया गया है।
पुलिस की मुश्किलों को कम करने की जगह इस सिक्योरिटी सिस्टम के हटने की वजह से परेशानियां दोगुनी हो गई हैं। यह थ्री टियर सिक्योरिटी ग्रिड आर्मी, बीएसएफ और पैरामिलिट्री फोर्सेज के साथ ही लोकल पुलिस को मिलाकर तैयार होता है।
जहां आर्मी और बीएसएफ आपस में घुसपैठ से जुड़ी इंटेलीजेंस को शेयर करते हैं तो जम्मू कश्मीर पुलिस आतंकियों की धर-पकड़ करती है।
आर्मी और बीएसएफ सिर्फ एलओसी तक
महबूबा मुफ्ती ने जब राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो आर्मी और बीएसएफ को हटा लिया गया था। सुरक्षा के इन दोनों ही अंगों को सिर्फ एलओसी तक ही सीमित कर दिया गया। इसके बाद आर्मी और बीएसएफ दोनों ही घाटी में आतंकियों की धर-पकड़ से दूर हो गए।
पुलिस को नहीं मिलती सही इंटेलीजेंस
यहां से पुलिस के बीच एक अच्छे तालमेल की कमी देखने को मिली और फिर आतंकी घाटी की सड़कों पर ही आजाद घूमते रहे। इस पूरी व्यवस्था ने पुलिस के लिए भी खतरे पैदा किए और उन्हें लगातार आतंकियों की ओर से निशाना बनाया जाने लगा।
सही इंटेलीजेंस के अभाव में कई मौकों पर पुलिस एकदम अनजान की तरह बर्ताव करती नजर आई। सिर्फ इतना ही पुलिस को आतंकियों के साथ नरमी बरतने के लिए कहा गया।
बदल सकती है स्थिति
यहीं से उनकी मानसिक ताकत को खत्म करने की कोशिशें होने लगीं। हालांकि आने वाले दिनों में इस स्थिति के बदलने की संभावना है।
सीआरपीएफ की 73 कंपनियां जो अमरनाथ यात्रा के लिए तैनात की गई थीं वह अब घाटी में लौट आएंगी। ऐसे में उम्मीद है कि पुलिस को काफी मदद मिल सकेगी।












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