आरक्षण वाले बयान को लेकर प्रियंका ने RSS चीफ भागवत को घेरा, बोलीं- मंसूबे खतरनाक हैं

नई दिल्ली- आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ओर से 'आरक्षण पर सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा' की बात कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को नागवार गुजरी है। उन्होंने संघ प्रमुख की इस टिप्पणी के खिलाफ आरक्षण का कार्ड खेलने की कोशिश की है। हालांकि, संघ ने भागवत के बयान के बचाव में कहा है कि वह तो हमेशा से वंचितों को आरक्षण देने का समर्थन करता रहा है।

प्रियंका के निशाने पर आरएसएस-बीजेपी

प्रियंका के निशाने पर आरएसएस-बीजेपी

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने मंगलवार को पहले अपने पिता राजीव गांधी की जयंती पर राजीव के साथ अपना एक पुराना और बेहद भावनात्मक फोटो ट्वीट करके उन्हें याद किया। लगभग दो घंटे बाद ही वो राजनीतिक मोड में उतर आईं और आरएसएस के साथ बीजेपी को निशाना पर लेते हुए एक सियासी ट्वीट दे मारा। प्रियंका ने अपने ट्वीट के जरिए भाजपा और संघ को आरक्षण विरोधी ठहराने की कोशिश की है। शायद प्रियंका को लगता है कि इस मुद्दे पर संघ और बीजेपी को घेरकर वो कांग्रेस की खिसकी हुई सियासी जमीन का आधार मजबूत कर सकती हैं।

आरएसएस के मंसूबे खतरनाक हैं- प्रियंका

अपने ट्वीट में प्रियंका ने लिखा है- "आरएसएस का हौसला बढ़ा हुआ है और मंसूबे खतरनाक हैं। जिस समय भाजपा सरकार एक-एक करके जनहित कानूनों का गला घोंट रही है। आरएसएस ने भी लगे हाथ आरक्षण पर बहस करने की बात उठा दी है। बहस तो शब्दों का बहाना है मगर आरएसएस-बीजेपी का असली निशाना सामाजिक न्याय है। लेकिन क्या आप ऐसा होने देंगे?"

भागवत के बयान का हो रहा है विरोध

भागवत के बयान का हो रहा है विरोध

गौरतलब है कि प्रियंका गांधी के अलावा आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी संघ प्रमुख पर निशाना साध चुके हैं। तेजस्वी ने ट्वीट किया है, 'मोहन भागवत जी के बयान के बाद आपको यह साफ होना चाहिए कि क्यों हम आपको संविधान बचाओ और बेरोजगारी हटाओ,आरक्षण बढ़ाओ के नारों के साथ आगाह कर रहे थे। सौहार्दपूर्ण माहौल की नौटंकी में ये आपका आरक्षण छीन लेने की योजना में काफी आगे बढ़ चुके हैं। जागो,जगाओ और अधिकार बचाने की मशाल जलाओ। आरक्षण को लेकर आरएसएस/बीजेपी की मंशा ठीक नहीं है। बहस इस बात पर करिए कि इतने वर्षों बाद भी केंद्रीय नौकरियों में आरक्षित वर्गों के 80% पद खाली क्यों है? उनका प्रतिनिधित्व सांकेतिक भी नहीं है। केंद्र में एक भी सचिव ओबीसी/ईबीसी क्यों नहीं है? कोई कुलपति एससी/एसटी/ओबीसी क्यों नहीं है? करिए बहस?' तेजस्वी ही नहीं इस मामले में केंद्रीय मंत्री और एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान भी भागवत की बातों से असहमति जता चुके हैं।

संघ की सफाई

संघ की सफाई

गौरतलब है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा था कि जो लोग आरक्षण के पक्ष में हैं और जो इसके खिलाफ हैं, उनके बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत होनी चाहिए। अब इसपर हो रहे विवाद के बाद संघ का कहना है कि बेवजह विवाद खड़ा करने की कोशिश हो रही है। संघ का ये भी कहना है कि उसकी ओर से जारी बयान में पहले ही कहा गया था कि आरएसएस हमेशा से वंचितों के आरक्षण के समर्थन में रहा है।

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