Weather Emergency: इस इमरजेंसी से अच्‍छी तो वो वाली इमरजेंसी थी- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्‍ली। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली की जहरीली हवा पर अब की सबसे बड़ी प्रतिक्रिया दी। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने दिल्‍ली में जारी प्रदूषण और इसकी वजह से घोषित इमरजेंसी यानी आपातकाल की स्थिति पर कहा, 'इस इमरजेंसी से अच्‍छी तो वह वाली इमरजेंसी थी।' सर्वोच्‍च न्‍यायालय का मानना है कि जहरीली हवा लोगों की जान ले रही है क्‍योंकि सरकार की कई एजेंसियां अपना काम ठीक से नहीं कर रही हैं। यह टिप्‍पणी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से उस समय की गई जब वह दिल्‍ली की हवा में तेजी से सुधार के लिए कई विकल्‍पों पर चर्चा कर रहा था।

हालात इमरजेंसी से ज्‍यादा खराब

हालात इमरजेंसी से ज्‍यादा खराब

जस्टिस अरुण मिश्रा ने दिल्‍ली की खराब एयर क्‍वालिटी पर यह टिप्‍पणी की। अपने घर जाने की कोशिशें कर रहे जस्टिस मिश्रा ने कहा, 'दिल्‍ली में यह स्थिति इमरजेंसी से ज्‍यादा खराब है। इस इमरजेंसी से अच्‍छी तो वह वाली इमरजेंसी थी।' दिल्‍ली में हवा के स्‍तर में कोई सुधार नहीं हो रहा है। सोमवार को एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स (एक्‍यूआई) 437 था और पीएम का औसत स्‍तर 2.5 था। यह स्‍तर सुरक्षा के स्‍तर से सात गुना ज्‍यादा खतरनाक स्‍तर पर पहुंच गया था। विशेषज्ञों ने इन हालातों के लिए हरियाणा और पंजाब में किसानों की तरफ से जलाई जा रही पराली को दोष दिया है। कहा जा रहा है कि शुक्रवार रात से जो स्थिति बिगड़ी है उसमें 46 प्रतिशत योगदान पराली का है।

पंजाब कुछ नहीं कर रहा

पंजाब कुछ नहीं कर रहा

पर्यावरण संरक्षण और नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) के चेयरमैन भूरे लाल कोर्ट पहुंचे थे और जजों ने सुनवाई शुरू की। 30 मिनट तक कोर्ट की कार्यवाही रुकी रही क्‍योंकि एक विशेषज्ञ को भी बुलाया गया था। विशेषज्ञ ने जजों को कहा कि वह व्‍यक्तिगत तौर पर मुख्‍य सचिवों को इस पूरी स्थिति के लिए दोष देंगे जो पराली जलने पर अंकुश लगाने पर पूरी तरह से विफल रहे हैं। कोर्ट को बताया गया कि हरियाणा ने तेजी से एक्‍शन लिया और पराली को जलने से रोकने के लिए कदम उठाए लेकिन पंजाब ने अभी तक कुछ भी नहीं किया है।

दिल्‍ली और केंद्र सरकार को फटकार

दिल्‍ली और केंद्र सरकार को फटकार

जैसे ही जजों ने लॉ ऑफिसर्स और विशेषज्ञों के सामने नए आइडियाज रखने शुरू किए, जस्टिस मिश्रा ने इशारा किया कि वह इस पूरे मसले पर चीफ सेक्रेटरीज को समन भेजना चाहती है। साथ ही ऐसे ऑफिसर्स जो पराली जलने को रोकने में असफल रहे हैं उनके हटाने के आदेश देने की इच्‍छुक है। जस्टिस मिश्रा ने कहा, 'किसानों के प्रति हमारी कोई संवेदनाएं नहीं हैं। वो क्‍या कर रहे हैं इस बात से वे पूरी तरह से अवगत हैं और वो लोगों की जान नहीं ले सकते।' कोर्ट ने इससे पहले हुई सुनवाई में दिल्‍ली और केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई थी।

सरकारों को बस चुनाव की चिंता

सरकारों को बस चुनाव की चिंता

कोर्ट ने कहा था, 'यह ऐसे नहीं चल सकता है और अब बहुत हो गया।' सुप्रीम कोर्ट के शब्‍दों में, 'राज्य सरकारें पूरी तरह से जिम्‍मेदार हैं कि वह पराली जलने पर कोई नियंत्रण नहीं लगा पाईं और उन्‍हें इसके लिए जवाब देना होगा। सर्वोच्‍च न्‍यायालय की मानें तो सरकारें बस चुनावों में ही लगी रहती हैं और अपने लोगों के लिए अपनी कोई जिम्‍मेदारी नहीं है। बस सबको चुनावों की ही पड़ी रहती है।'

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