इलेक्टोरल बॉन्ड के दस बड़े दानदाता कौन हैं? जानें किस पार्टी को मिला है सबसे अधिक चुनाव के लिए ये बॉन्‍ड चंदा?

Electoral Bonds: लोकसभा चुनाव से पहले इलेक्टोरल बॉन्ड लगातार चर्चा में बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद चुनाव आयोग ने रविवार को विभिन्‍न राजनीतिक दलों द्वारा उसे सौंपे गए सीलबंद लिफाफों में बंद धनराशि के बारे में जानकारी दी। आइए जानते हैं सबसे अधिक इलेक्टोरल बॉन्ड में पैसा देने वाली टॉप दस बड़े डोनर्स कौन हैं और किस राजनीतिक दल को सबसे अधिक धन मिला है।

Electoral Bonds

चुनाव आयोग ने खुलासा कि किस पार्टी को चुनावी बॉन्‍ड से कितना पैसा मिला और किस कंपनी या व्‍यक्ति ने दिया। इस खुलासे के बाद बड़ी दिलचस्‍प बातें भी सामने आई। नीतीश कुमार की जेडीयू, स्‍टलिन की डीएमके समेत अन्‍य कई पार्टियों ने बताया कि उन्‍हें जो 10 करोड़ रुपये इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड के जरिए मिले हैं वो गुमनाम चुनावी बांड है, उनमें कोई नाम नहीं था। उनके कार्यालय के गेट पर कोई अज्ञात स्रोत लिफाफा छोड़ कर चला गया था। जिसे उन्‍होंने अपने पार्टी के चंदे वाले खाते में भुना लिया है।

इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए कुल कितना मिला चंदा?
चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गई जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल, 2019 से 15 फ़रवरी, 2024 तक कुल 12,156 करोड़ रुपये का चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए देश की विभिन्‍न राजनीतिक पार्टियों को दिया गया है।

इलेक्टोरल बॉन्ड के बड़े दानी कौन हैं?

  • फ्यूचर गेमिंग ऐंड होटल सर्विसेज ने 1368 करोड़ रुपये इस बॉन्‍ड के जरिए दान किए।
  • मेघा इंजीनियरिंग ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने 966 करोड़ इसी तरह दान किए।
  • क्विक सप्लाई चेन 410 करोड़ रुपये इलेक्टोरल बॉन्ड दान किए हैं।
  • वेदांता ग्रुप 402 करोड़ इलेक्टोरल बॉन्‍ड के जरिए दान किए हैं।
  • हल्दिया इंजीनियरिंग लिमिटेड 377 करोड़ इलेक्टोरल बॉन्‍ड के जरिए दान किए हैं।
  • भारती एयरटेल ग्रुप 247 करोड़ रुपये इलेक्टोरल बॉन्‍ड के जरिए दान किए हैं।
  • एस्सेल माइनिंग 224 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्‍ड के जरिए दान किए हैं।
  • वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड 220 करोड़ रुपये इलेक्टोरल बॉन्‍ड के जरिए दान किए हैं।

किस पार्टी को मिला सबसे अधिक चुनावी बॉन्‍ड से धन

चुनाव आयोग ने रविवार को 2018 में योजना शुरू होने के बाद से राजनीतिक दलों को चुनावी बांड और फंड से जुड़ी नई जानकारी साझाा की जिसमें बताया कि किस राजनीतिक पार्टी को किस कंपनी या व्यक्ति से कितना धन प्राप्‍त हुआ है।

भाजपा को मिला है सबसे अधिक धन

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भाजपा को बांड के जरिए सबसे अधिक 6,986.5 करोड़ रुपये की धनराशि मिली है। हालांकि भाजपा ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम और आयकर अधिनियम के संबंधित हिस्सों का हवाला देते हुए धनराशि किसने दी है, इसका खुलासा नहीं किया है।

दूसरे नंबर पर डीएमके

वहीं इस लिस्‍ट में दूसरे नंबर पर तमिलनाडु की सत्‍तारूढ़ डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 665.5 करोड़ रुपये की धनराशि मिली है। डीएमके को ये धनराशि दान करने वाले लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के फ्यूचर गेमिंग एंड सर्विसेज और मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा है जो डीएमके के लिए शीर्ष दानदाताओं में हैं, जिसमें 77 फीसदी हिस्‍सा फ्यूचर गेमिंग ने 509 करोड़ और मेघा इंजीनियरिंग ने 105 करोड़ का योगदान दिया है।

अन्‍य पार्टियों को कितना मिला बॉन्‍ड के जरिए चंदा

  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी को बंद लिफाफे में बंद 10 करोड़ रुपये मूल्य के बॉन्ड गुमनाम बांड मिले थे। जिसे उन्‍होंने पार्टी के चंदे वाले खाते में जमा करवा दिए हैं।
  • 2019 में आम आदमी पार्टी को बजाज ग्रुप से 3 करोड़ और टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स से 1 करोड़ मिले। यानी चार करोड़ आप को इस बॉन्‍ड के जरिए मिले।
  • पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस 1,397 करोड़ रुपये मिले हैं
  • कांग्रेस 1,334 करोड़ रुपये मिले हैं।
  • भारत राष्ट्र समिति 1,322 करोड़ रुपये को मिले हैं।
Electoral Bonds

इन राजनीतिक पार्टियों को नहीं मिला एक रुपया भी

राष्ट्रीय दलों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), और राज्य दलों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और केरल कांग्रेस ने बताया उनकी पार्टी को कोई चुनावी बांड (ईबी) के जरिए एक भी पैसा नहीं मिला है। अन्य कई राष्ट्रीय पार्टियों ने दानदाताओं का नाम बताये बिना ही राशि की घोषणा कर दी है।

क्‍या है ये इलेक्टोरल बॉन्ड?

चुनाव के दौरान प्रचार करने के लिए राजनीति पार्टियां होर्डिंग, पोस्‍टर लगवाती है और रैली समेत जनसंपर्क के लिए जनसभाएं करती हैं। इस प्रचार के लिए पार्टियां को चंदे के रूप में मोटी रकम मिलती है। राजनीतिक दलों को ये चंदा दो प्रकार से मिलता है जिसमें कोई कंपनी या व्यक्ति चेक काटकर पार्टी खाते में जमा करवा दें या इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफ़र कर दे।

वहीं दूसरा तरीका चुनावी बॉन्ड या इलेक्टोरल बॉन्ड है। जो सीधे पार्टी के अकाउंट में नहीं बल्कि कंपनी या व्‍यक्ति एसबीआई में पार्टी के नाम पर अलग-अलग मूल्यों के बॉन्ड ले सकते हैं। ये रकम कितनी लाखों करोड़ कितना भी हो सकती है।

सरकार हर साल जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर यानी चार बार दस-दस दिनों के लिए इन्हें जारी करती है। तब इच्‍छुक कंपनी या व्‍य‍क्ति अपनी पसंदीदा राजनीतिक दल को इस बॉैन्‍ड के जरिए धन डोनेट कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी है रोक और EC से मांगा था आंकड़ा

हालांकि हाल ही में इससे संबंधित एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने इस बॉन्‍ड पर रोक लगा दी थी साथ ही चुनाव आयोग को सख्‍त आदेश दिया था कि इस बॉन्‍ड के तहत पार्टियों को जितनी भी धनराशि मिली है और किसने दी है, इस सबके बारे में जानकारी दें।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+