जानें क्या होता है प्रोटेम स्पीकर, जिसको लेकर तेलंगाना में छिड़ा है विवाद, कौन करता है नियुक्त, जानिए नियम
Telangana Protem Speaker Controversy: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने तेलंगाना में जबरदस्त जीत दर्ज की है। तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनते ही नया विवाद खड़ा हो गया है। नया विवाद इसलिए खड़ा हो गया है, क्योंकि तेलंगाना विधानसभा में एआईएमआईएम के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है। जिसे लेकर भाजपा ने विरोध करना शुरू कर दिया है। बीजेपी के विधायकों ने शपथ ग्रहण का बहिष्कार किया है।
कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसको लेकर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में भाजपा विधायक स्वांग रच रहे हैं और उनकी पार्टी भ्रम फैला रही है। क्योंकि जो हम हमेशा से कहते थे आखिर वो सिद्ध हो ही गया। कहा कि AIMIM ही भाजपा की B टीम है।

क्या बोलीं कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि अकबरुद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाने का फैसला तेलंगाना की राज्यपाल का है। अगर कोई भी संशय है तो भाजपा अपने ही द्वारा नियुक्त राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन से पूछ सकती है। आइए हम आपको बताते हैं प्रोटेम स्पीकर कैसे चुने जाते हैं? क्या योग्यता होती है? कौन अनुशंसा करता है? राज्यपाल का क्या रोल है?
कैसे चुने जाते हैं प्रोटेम स्पीकर?
सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर चुना जाता है। इस मामले में वरिष्ठता सदन में सदस्यता से देखी जाती है न कि माननीय सदस्य की उम्र से। संवैधानिक परंपरा के अनुसार प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के लिए कोई विशिष्ट संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान नहीं हैं।
प्रोटेम स्पीकर की शक्तियां
सद में नए सदस्यों को शपथ दिलाना।
विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव कराना।
फ्लोर टेस्ट करने का काम करना।
स्थायी स्पीकर चुने जाने तक सदन की गतिविधियों को चलाना।
प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति में राज्यपाल की भूमिका
विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति राज्यपाल करता है। हर बार चुनाव के बाद प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति की जाती है। अनुच्छेद 180(1) के तहत राज्यपाल को विशेष रूप से प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने का अधिकार है। वह मंत्रिपरिषद की सलाह से या स्वतंत्र रूप से अपने विवेक का प्रयोग कर सकते हैं।
क्या होता है प्रोटेम स्पीकर
प्रोटेम (Pro-tem) का अर्थ होता है कुछ समय के लिए। प्रोटेम स्पीकर कुछ समय के लिए विधानसभा में काम करता है। प्रोटेम स्पीकर कुछ समय के लिए कार्य करता है और यह अस्थायी होता है। इसकी नियुक्ति तब तक के लिए होती है, जब तक स्थायी विधानसभा अध्यक्ष ना चुन लिया जाए।
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