तेलंगाना चुनाव में अचानक रेस में कैसे आ गई बीजेपी, इन तीन घोषणाओं से बदल सकता है समीकरण?
तेलंगाना विधानसभा चुनावों के लिए 30 नवंबर को मतदान होना है। अभी से पहले तक जितने ओपिनियन पोल और चुनाव-पूर्व सर्वे हुए, उसमें मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बीआरएस और कांग्रेस के बीच ही दिखाया जा रहा था। लेकिन, अचानक पिछले कुछ समय से बीजेपी भी इस चुनावी रेस में आती नजर आ रही है।
तेलंगाना चुनाव से पहले राज्य को लेकर बीजेपी और उसकी केंद्र सरकार की ओर से तीन बड़ी घोषणाएं की गई हैं। सबसे अंतिम घोषणा राज्य में अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण वाली मडिगा जाति की मांग को लेकर है, जिस ओर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्यान दिया है।

तीन घोषणाओं से भाजपा का बढ़ा भरोसा
इससे पहले बीजेपी तेलंगाना में चुनाव जीतने पर पिछड़े वर्ग (BC) के नेता को मुख्यमंत्री बनाने का वादा कर चुकी है। इन दोनों ही वादों को लेकर राज्य में चुनावी अटकलबाजियां बढ़ गई हैं। क्योंकि, बीआरएस और कांग्रेस इसपर बैकफुट पर नजर आ रही हैं। तीसरी घोषणा राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का गठन है, जो तेलंगाना के किसानों की बहुत ही पुरानी मांग रही है।
मडिगा वोट बैंक अगर बीजेपी के पक्ष में झुका तो मजबूत हो सकती है पार्टी
भारतीय जनता पार्टी की इन तीनों ही घोषणाओं को बीआरएस और कांग्रेस चुनावी स्टंट साबित करने में जुटी हैं। लेकिन, टीओआई को दिए एक इंटरव्यू में प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा है कि उनकी पार्टी इन सभी घोषणाओं को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, 'मडिगाओं की मांगों पर ध्यान देने वाली समिति एक सीरियस टास्क फोर्स होगी। इस मुद्दे ने पीएम मोदी का ध्यान खींचा है और वे इस मुद्दे के प्रति प्रतिबद्ध हैं.....पीछे कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने उषा मेहरा कमेटी की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था.....'
तेलंगाना में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी करीब 18% है, जिनमें से मडिगा सबसे ज्यादा या लगभग 60% बताए जाते हैं। राज्य की 119 विधानसभा सीटों में से इनका प्रभाव 20 से 25 सीटों पर बहुत ही ज्यादा है। अन्य कई सीटों पर भी यह चुनाव की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के बाद यह दलित समुदाय 'भावनात्मक' होकर भाजपा के पक्ष में वोट डाल सकता है, इसकी चर्चाएं बहुत तेज बताई जा रही है।
पिछड़े सीएम के वादे से भी भाजपा को काफी उम्मीद
दूसरा भाजपा ने पिछड़े वर्ग के सीएम का वादा करके भी खुद को चुनावों में गंभीर प्रतिद्वंद्वी और मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है। इस मुद्दे को भी पार्टी पूरे दमखम के साथ उठा रही है। कांग्रेस और बीआरएस नेताओं को इसका जवाब देना पड़ रहा है। बीजेपी के लिए यह मसला कितना गंभीर है, उसके बारे पार्टी अध्यक्ष ने बताया है कि इसी वजह से ही शायद पार्टी ने उन्हें चुनाव नहीं लड़ाया है। गौरतलब है कि तेलंगाना में भाजपा ने तीन सांसदों को टिकट दिया है, लेकिन जी किशन रेड्डी उनमें शामिल नहीं हैं।
उन्होंने इसके बारे में कहा, 'हम अगर सत्ता में आते हैं तो पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री घोषित करने जा रहे हैं। अगर मैं बीजेपी का अध्यक्ष चुनाव लड़ता तो इससे पार्टी की इस घोषणा को लेकर लोगों में गलत संदेश पहुंचता।'
किंग या किंगमेकर यह तो नीतिगत फैसले हैं- जी किशन रेड्डी
इन घोषणाओं का परिणाम ये हुआ है कि जो बीजेपी पिछले महीने तक कहीं भी रेस में नहीं थी, उसके लिए पार्टी के कुछ नेता किंगमेकर की भूमिका में उभरने की भविष्यवाणी करने लगे हैं। क्योंकि, त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में पार्टी अपने लिए अच्छा मौका देख रही है। वैसे रेड्डी ज्यादा उम्मीद लगा रहे हैं, 'मैंने कभी नहीं कहा कि त्रिशंकु विधानसभा होगी। हम अपने दम पर जादुई आंकड़े तक पहुंचने के प्रति आश्वस्त हैं। किंग या किंगमेकर यह तो नीतिगत फैसले हैं..... '
भारतीय जनता पार्टी तेलंगाना के जिन जिलों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है, उसमें हैदराबाद, रंगारेड्डी, करीमनगर, निजामाबाद और आदिलाबाद शामिल हैं।












Click it and Unblock the Notifications