Tamil Nadu: अन्नाद्रमुक ने बीजेपी से क्यों तोड़ा गठबंधन? अंदर की बात समझिए
बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगियों में शामिल तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले अचानक गठबंधन तोड़ने का फैसला क्यों किया? क्योंकि, इसकी घोषणा पर अन्नाद्रमुक कार्यकर्ताओं ने जिस तरह से जश्न मनाया, वह हैरान करने वाला है।
यह बात तो सही मानी जा रही है कि गठबंधन में खटास बढ़ने की मुख्य वजह प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई हैं, जिनके बयानों और आक्रमक रणनीतियों ने भाजपा की सहयोगी को कई मौकों पर असहज किया है।

डीएमके को अभी भी गठबंधन टूटने पर यकीन नहीं
तमिलनाडु में एनडीए के दोनों सहयोगियों के रिश्ते पहले इतने मजबूत रहे हैं कि सत्ताधारी डीएमके को अभी भी एआईएडीएमके के ऐलान पर यकीन नहीं हो रहा है। प्रदेश के मंत्री और पार्टी नेता उदयनिधि स्टालिन का दावा है कि यह सब दिखावा है और लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी-एआईएडीएमके फिर से साथ हो सकते हैं।
अन्नाद्रमुक ने भविष्य की योजना नहीं बताया है
स्टालिन की आशंका की वजह ये हो सकती है कि अन्नाद्रमुक अपने भविष्य के सहयोगियों को लेकर अभी तक चुप्पी साधे है। पार्टी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या आगे वह अपनी शर्तों पर बीजेपी के साथ तालमेल पर फिर से विचार भी कर सकती है।
एआईएडीएमके को अपना जनाधार खिसकने का डर था
एनडीए गठबंधन में हुई इस टूट की गहराई में जाएं तो दोनों दलों में दूरी बढ़ने की शुरुआत 2022 के जून से ही हो गई थी। तब दिग्गज अन्नाद्रमुक नेता सी पोन्नैयन ने इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि बीजेपी तमिलनाडु में अपना आधार जमा रही है। उन्हें लगा था कि यह सब उन्हीं की पार्टी के दम पर हो रहा है।
आगे बिगड़ते चले गए रिश्ते
दोनों दलों के बीच रिश्ते बिगड़ने शुरू हो ही चुके थे। इस साल फरवरी में इरोड विधानसभा उपचुनाव में जो बैनर लगाए गए उसमें अन्नाद्रमुक ने एनडीए की जगह 'एआईएडीएमके एलायंस' शब्द का इस्तेमाल किया। अगले ही महीने तमिलनाडु में भाजपा के आईटी सेल से जुड़े सीटीआर निर्मल कुमार जब अन्नाद्रमुक में शामिल हो गए तो दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में झड़प तक की नौबत पैदा हो गई।
जयललिता पर दिया गया बयान विवाद को पूरी तरह बढ़ा दिया
इसके बाद जब अन्नामलाई ने अपनी पत्नी को 'जयललिता से 100% अधिक शक्तिशाली' बता दिया तो उसने आग में घी का काम करना शुरू कर दिया। एआईएडीएमके के नेताओं के लिए उनकी यह विवादित टिप्पणी असहनीय हो गई। लेकिन, अन्नामलाई के काम करने के आक्रमक स्टाइल पर असर नहीं पड़ा। उन्होंने भ्रष्टाचार को लेकर पहले सत्ता में रह चुकी पार्टियों को भी घेरना शुरू किया, जो सहयोगी दल के लिए काफी असहज हो चुका था। जून में पार्टी ने उनकी निंदा वाला एक प्रस्ताव भी पारित किया।
उदयनिधि कांड ने लगाई अन्नाद्रमुक के फैसले पर मुहर
दोनों दलों के बीच बढ़ती बेरुखी में एआईएडीएमके को सनातन धर्म पर डीएमके नेता और मंत्री उदयनिधि स्टालिन की आपत्तिजनक टिप्पणी का सहारा मिल गया। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अपने अंदाज में डीएमके के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। सड़क पर बीजेपी ही बीजेपी विपक्ष के रूप में दिखाई पड़ रही थी। बस अब मौका द्रविड़ राजनीति के नाम पर 'शहादत' देने का आ चुका था। राज्य में किसी भी सूरत में 'उत्तर' भारतीय पार्टी के दबाव में आने का सियासी मतलब नहीं था।
पहले 18 सितंबर को एआईएडीएमके की ओर से कहा गया कि कम से कम फिलहाल के लिए बीजेपी उसकी सहयोगी नहीं रह गई है। लेकिन, जल्द ही इस फैसले को स्थायी निर्णय में बदल दिया गया।












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