Swami Sivananda: योग ही नहीं, 125 वर्षीय पद्मश्री विजेता की लंबी उम्र का राज ये भी है

नई दिल्ली, 22 मार्च: सोमवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 125 वर्षीय योग गुरु स्वामी शिवानंद को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है। स्वामी शिवानंद के जीवन की सादगी और उनका निरोग रहते हुए लंबा जीवन बिताना हमेशा से विदेशी मीडिया के भी आकर्षण का केंद्र रहा है। उनकी लंबी उम्र में योग का अनमोल योगदान तो है ही, लेकिन और भी कई चीजें हैं, जिसको अपनाकर वह करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं। राष्ट्रपति भवन में अवॉर्ड लेते वक्त जो उनका व्यक्तित्व सामने आया था, उसके बाद उनको लेकर लोगों के मन में श्रद्धा और बढ़ गई है।

100 साल से लंबी तपस्या की झलक दिखी

100 साल से लंबी तपस्या की झलक दिखी

125 वर्षीय योग गुरु स्वामी शिवानंद पद्मश्री पुरस्कार लेने के दौरान जिस तरह से राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में नंगे पांव चल रहे थे और जिस तरह से उन्होंने दंडवत करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का अभिवादन किया, वह इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। उनके इस विनम्र अंदाज पर पूरा दरबार हॉल खड़ा हो गया और तालियों की गड़गड़ाहट ने माहौल को बहुत ही भावपूर्ण बना दिया। उनका ये अंदाज देखकर पीएम मोदी ने भी जमीन पर झुककर उन्हें नमस्कार किया और राष्ट्रपति ने भी प्रोटोकॉल के दायरे से ऊपर उठकर आगे बढ़ते हुए उन्हें खुद पकड़कर उठाया और अवॉर्ड दिया। लेकिन, सोमवार को दरबार हॉल में सफेद लुंगीनुमा-धोती और कुर्ते में स्वामी शिवानंद का जो रूप देश-दुनिया ने देखा, उसके पीछे सौ साल से भी ज्यादा लंबी उनकी कठोर तपस्या है।

बहुत ही संघर्ष से भरा रहा है जीवन

बहुत ही संघर्ष से भरा रहा है जीवन

अविभाजित भारत के सिलहट जिले (अब बांग्लादेश) में जन्मे स्वामी जी ने अपना सारा जीवन मानव समाज के लिए समर्पित किया है। योग गुरु का बचपन बड़ी ही गरीबी में बीता है। उनके माता-पिता उन्हें किसी तरह सिर्फ 'भात' (उबला हुआ चावल) खाने को दे पाते थे। लेकिन, इतने पर भी हालात को उनपर तरस नहीं आया। वे 6 साल के ही थे कि माता-पिता दोनों गुजर गए। फिर पश्चिम बंगाल के नबाद्वीप में गुरुजी के आश्रम का ही सहारा बचा। लेकिन, गुरु ओंकारानंद गोस्वामी के सानिध्य में उनके जीवन में बड़ा बदलावा आया। उन्हें उनसे ही सभी तरह की प्रायोगिक और आध्यात्मिक शिक्षा मिली। अपने अनुशासित जीवन और सुबह के योग से वह देश में योगासन का आदर्श बन गए।

स्वामी शिवानंद की लंबी उम्र का राज ये भी है

स्वामी शिवानंद की लंबी उम्र का राज ये भी है

उनकी लंबी उम्र में योग का सबसे बड़ा योगदान है, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन, इसके पीछे कई और राज हैं, जिसका पालन उन्होंने ताउम्र पूरी श्रद्धा के साथ किया है और आज भी निभा रहे हैं। इसमें उनका आहार और दिनचर्या का बहुत रोल है। वह जिस तरह का भोजन करते हैं, उसको अपनाना सबके लिए इतना आसान नहीं है, लेकिन इससे उन्हें रोग-मुक्त और तनाव-मुक्त जीवन मिल पाया है और इसलिए वह आज भी ऊर्जा से भरे हुए हैं। स्वामी शिवानंद अक्सर कहते हैं कि उनका खाना तेल-मुक्त और बिना मसालों का होता है। वह 'भात' और दाल खाना पसंद करते हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि वह दूध और फल के सेवन से भी परहेज करते हैं, क्योंकि वे इन्हें फैंसी खाना मानते हैं। 2016 में उन्होंने न्यूज एजेंसी एएफपी से कहा था, 'मैं सादगी वाला और अनुशासित जीवन जीता हूं। मैं बहुत ही सामान्य खाता हूं- सिर्फ उबला हुआ खाना, बिना तेल या मसालों के, चावल और उबली हुई दाल के साथ एक जोड़ी हरी मिर्च।'

125 साल की उम्र में भी पूरी तरह फिट और निरोग हैं

125 साल की उम्र में भी पूरी तरह फिट और निरोग हैं

यही वजह है कि 125 साल की उम्र में भी वह पूरी तरह से फिट हैं और उन्हें स्वास्थ्य से सबंधी कोई परेशानी नहीं है। उनकी दिनचरर्या सुबह 3 बजे शुरू होती है। उनका लंबा जीवन और बेहतरीन स्वास्थ्य हमेशा अंतरराष्ट्रीय मीडिया को आकर्षित करता रहा है। स्वामी शिवानंद के पासपोर्ट के अनुसार उनका जन्म 8 अगस्त, 1896 को हुआ था।

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