• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

Swami Agnivesh: जानिए स्वामी अग्निवेश को क्यों याद रखेगा हिन्दुस्तान?

|

नई दिल्ली। वक्त के आईने में स्वामी अग्निवेश के दो अक्श उभरे। एक प्रतिबिम्ब में वे समर्पित समाज सुधारक दिखायी पड़ते हैं तो दूसरे में विवादास्पद नेता। उनके समर्थक कहते थे कि वे देखने में संत जैसे लगते थे लेकिन बातें नेता की तरह करते थे। उनकी शख्सियत के कई रंग थे। वे वैदिक विद्वान थे, कोलकाता के मशहूर सेंट जेवियर्स कॉलेज में शिक्षक थे, दलितों को मंदिर में प्रवेश दिलाने और बंधुआ अधिकार के आंदोलनकर्ता थे, विधायक थे, मंत्री थे और फिर शराबबंदी के प्रचार के लिए जदयू के नेता भी थे। उन पर अन्ना आंदोलन के भेदिया होने, नक्सलियों के समर्थक होने और हिन्दू धर्म के विरोधी होने का भी आरोप लगा।

स्वामी अग्निवेश की मकबूलियत

स्वामी अग्निवेश की मकबूलियत

स्वामी अग्निवेश का मूल नाम वेपा श्याम राव था और उनका जन्म आंध्र प्रदेश के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन में इनके पिता के देहांत हो गया तो उनका लालन-पालन नाना ने किया। उनके नाना छत्तीसगढ़ के सेक्ति रियासत में दीवान थे। वेपा राव पढ़ने में बहुते तेज थे। उन्होंने कानून और कॉमर्स में डिग्री ली। फिर वे कोलकाता के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स कॉलेज में शिक्षक हो गये। उन्होंने मशहूर वकील सव्यसाची मुखर्जी के जूनियर के रूप में भी काम किया। बाद में सव्यसाची मुखर्जी भारत के मुख्य न्यायाधीश हुए। 1970 ने उन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया और आर्यसमाज में शामिल हो गये। उस समय उनकी उम्र 31 साल थी। संन्यास लेने के बाद वेपा श्याम राव का नाम स्वामी अग्निवेश हो गया। सात साल बाद राजनीति में आ गये। उन्होंने आर्य सभा के नाम से एक राजनीति दल बनाया था। वे जेपी आंदोलन में सक्रिय थे। 1977 में हरियाणा से विधायक बने। 1979 में वे हरियाणा के शिक्षा मंत्री बने। शिक्षा मंत्री रहते उन्होंने सामाजिक सुधार आंदोलन चलाया। इसी समय उन्होंने बंधुआ मुक्ति मोर्चा नाम से संगठन बनाया। उन्होंने बंधुआ मजदूरों की मुक्ति के लिए उल्लेखनीय कार्य किये। मजदूरों पर लाठीचार्ज की एक घटना से दुखी हो कर उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

 नक्सलियों के समर्थक होने का आरोप

नक्सलियों के समर्थक होने का आरोप

स्वामी अग्निवेश पर नक्सलियों के समर्थक होने का आरोप लगा था। मार्च 2011 में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में तीन सुरक्षाकर्मियों की घात लगा कर हत्या कर दी थी। सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की खोज के लिए कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया लेकिन ग्रामीणों के असहयोग से वे पकड़ में नहीं आ रहे थे। इसके बाद आरोप लगा कि सुरक्षा बलों ने किसानों के सहयोग से उस गांव को जला दिया था। इसके बाद स्वामी अग्निवेश अपने संगठन के साथ रिलीफ कैंप चलाने के लिए उस गांव में पहुंच गये थे। इससे नक्सलियों से तबाह लोग उग्र हो गये। उन्होंने स्वामी को घेर कर पूछा कि जब सुरक्षा बलों के जवान मारे जाते हैं तब आप उनकी खैरियत क्यों नहीं पूछते ? निर्दोष लोगों की हत्या करने वाले नक्सलियों के समर्थक गांव के लिए आप राशन पानी लेकर पहुंच गये ? इसके बाद उग्र भीड़ ने स्वामी अग्निवेश पर हमला कर दिया। 2013 में वे भारत सरकार और नक्सलियों के बीच शांति वार्ता के लिए मध्यस्थ बने थे। तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदम्बरम के आग्रह पर वे वार्ताकार बने थे। सरकार तीन महीने के सीजफायर के लिए तैयार भी हो गयी थी। लेकिन बाद में बात नहीं बनी। उस समय भी स्वामी अग्निवेश पर नक्सलियों की हिमायत करने का आरोप लगा था, क्यों कि वे बलप्रयोग के खिलाफ थे। लेकिन उन्होंने इससे इंकार किया था।

अन्ना आंदोलन के भेदिया !

अन्ना आंदोलन के भेदिया !

2011 में जब अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जनआंदोलन किया तो स्वामी अग्निवेश उसमें शामिल थे। उस समय उन पर आरोप लगा था कि वे आंदोलन की बातें तत्कालीन कांग्रेस सरकार तक पहुंचा रहे थे। उस समय डेढ़ मिनट का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें स्वामी अग्निवेश और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के बीच बातचीत रिकॉर्ड होने का दावा किया गया था। इस वीडियो के आधार पर स्वामी अग्निवेश पर गंभीर आरोप लगाया गया था। आरोप के मुताबिक, स्वामी ने तब कपिल सिब्बल से कहा था, मनमोहन सरकार जितना झुक रही है अन्ना हजारे के लोग उतना ही सिर पर चढ़े जा रहे हैं। सरकार को इतना नहीं झुकना चाहिए। इसके अलावा स्वामी पर अन्ना आंदोलन के खिलाफ बयान देने का आरोप लगा था। आरोप के मुताबिक, स्वामी ने कहा था, यदि सरकार सिविल सोसाइटी के सभी मांगें मान लेती है तो प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने पर सोचा जा सकता है। बाद में उन्हें टीम अन्ना से हटा दिया गया था।

 जदयू में हुए थे शामिल

जदयू में हुए थे शामिल

स्वामी अग्निवेश 2016 में नीतीश कुमार की शराबबंदी से प्रभावित हो कर जदयू में शामिल हो गये थे। उन्होंने नीतीश कुमार की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा था कि यह अभियान पूरे देश में चलाया जाना चाहिए। शराबबंदी को लागू कर ही हम जेपी की सम्पूर्ण क्रांति के सपने को पूरा कर सकते हैं। शराबबंदी से ही गरीबों का भला होगा। तब स्वामी अग्निवेश ने इस बात पर खुशी जतायी थी वे जदयू में शामिल हो कर 1977 के अपने पुराने घर में लौट आये हैं। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने उन्हें दल की सदस्यता दिलायी थी। उन्होंने कहा था कि 1977 में मैं जेपी के बुलावे पर राजनीति में आया था और अब मैं नीतीश कुमार से प्रभावित हो कर राजनीति में आ रहा हूं। जीवन के कई रंग समेटे स्वामी अग्निवेश अब केवल स्मृतियों में हैं।

ये भी पढ़िए- स्वामी अग्निवेश के निधन पर बोलीं सोनिया गांधी, वो जीनवनभर कमजोरों के लिए लड़ते रहे

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Swami Agnivesh work against bonded labour Social activist politician Arya Samaj leader
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X