प्यार की ‘बाली उमर’ को सुप्रीम कोर्ट ने किया सलाम, शादी पर लगाई मुहर
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। कोशिश कर के देख ले दरिया सारे, नदियां सारी
पर दिल की लगी नहीं बुझती, बुझती है हर चिंगारी...
सोलह बरस की बाली उमर को सलाम ऐ प्यार! तेरी पहली नज़र को...
सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म 'एक दूजे के लिए' के इस गाने पर अमल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक नायाब फैसला सुनाया। रूढ़िवादी और परम्परावादी समाज से दो-दो हाथ कर शादी करने वाले प्रेमी जोड़े को तीन साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक होने का फैसला सुनाया। हालांकि इस मिलन में देरी की वजह युवती का नाबालिग होना था और यह बाधा हटते ही देश की सबसे बड़ी अदालत ने उन्हें एक साथ रहने की हरी झंडी दे दी।
युवक और युवती उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रहने वाले हैं। जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने गौरव और उसकी प्रेमिका सोनाली (दोनों के काल्पनिक नाम) के साथ वैवाहिक जीवन बिताने की इजाजत दे दी है। जबतक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहा युवती लखनऊ के नारी निकेतन में रह रही थी।
बाली उम्र के प्यार की पूरी कहानी
गौरव और सोनाली का घर बहराइच में आमने-सामने था। सोनाली नाबालिग थी और गौरव बालिग था। जिस वक्त दोनों का प्यार परवान चढ़ा उस वक्त गौरव की उम्र 21 साल की थी। दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया लेकिन घर वालों को रिश्ता मंजूर नहीं था। दोनों परिवारों के बीच आपत्ति की सबसे बड़ी वजह अलग-अलग जाति का होना था। गौरव दलित है जबकि सोनाली ब्राह्मण। इसके बाद दोनों ने अपना घर बसाने का निर्णय लिया और दोनों ने वर्ष 2011 में मंदिर में सात फेरे ले लिए।
प्यार के लिए जेल तक चला गया
दोनों के शादी की बात युवती के परिजनों को नागवार गुजरी और शादी के करीब एक महीने बाद उन लोगों ने युवक के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया। इस शिकायत के बाद पुलिस ने गौरव को जेल में डाल दिया। महीनों तक सजा काटने के बाद गौरव को जमानत मिल गई। सोनाली के यह कहने के बाद भी कि वह अपनी मर्जी से गौरव के साथ गई थी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुकदमा निरस्त करने से इनकार कर दिया। लिहाजा गौरव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।













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