Farmers Protest: किसान बार्डर पर प्रदर्शन करेंगे या उन्हें कहीं और भेजा जाएगा?, SC में सुनवाई आज
Farmers Protest: कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन पिछले 21 दिनों से जारी है, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं तो वहीं सरकार की कोशिश इस मुद्दे को बातचीत से सुलझाने की है, वो कानून को रद्द नहीं करना चाहती है। दोनों के बीच फिलहाल तो ठनी हुई है, ऐसे में किसान बॉर्डर पर टिकेंगे या उन्हें कहीं और भेजा जाएगा, इस बारे में आज सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना सकता है। मालूम हो कि देश की सर्वोच्च अदालत में किसानों को दिल्ली बॉर्डर से हटाने को लेकर याचिका दी गई है।
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जिस पर आज चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच सुनवाई करेगी, ये याचिका कानून के छात्र ऋषभ शर्मा ने दी है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि कोरोना काल में इस तरह से भारी संख्या में बार्डर पर किसानों का रहना सही नहीं है, उन्हें सरकार द्वारा आवंटित तय स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। इस तरह से बार्डर सील करना और बिना मास्क के प्रदर्शन करना उचित नहीं है, इसलिए तत्काल प्रभाव से किसानों को बार्डर पर से हटना चाहिए। इसके अलावा उच्चतम न्यायालय में एक और याचिका दी गई है, जिसमें कहा गया कि वो केंद्र सरकार को आदेश दे कि किसानों की मांग पर विचार करें और कानून को संशोधित करे।
सरकार और किसान नेताओं के बीच हुई है 6 दौर की बातचीत
मालूम हो कि अब तक सरकार और किसान नेताओं के बीच 6 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन इसका नतीजा कोई नहीं निकला है। मालूम हो कि केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से ही आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
नए कानून से हमें नुकसान है: किसान
किसानों को कहना है कि ये कानून मंडी सिस्टम और पूरी खेती को प्राइवेट हाथों में सौंप देंगे, जिससे किसान को भारी नुकसान उठाना होगा। नए कानूनों के खिलाफ ये आंदोलन अभी तक मुख्य रूप से पंजाब में हो रहा था। 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली की और कूच किया है और बीते 21 दिनों से किसान दिल्ली और हरियाणा के बार्डर पर धरना दे रहे हैं।












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