क्या मुसलमानों में हलाला और एक से ज्यादा निकाह पर लगेगा बैन ? SC की 5 सदस्यीय संविधान पीठ करेगी सुनवाई
मुसलमानों में निकाह हलाला और चार निकाह वाली प्रथा के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई के लिए नए सिरे से संविधान पीठ गठित होगी। सीजेआई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने यह भरोसा दिया है।

मुसलमानों में तीन तलाक की कुप्रथा पर रोक लगने के बाद अब निकाह हलाला और बहुविवाह का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अदालत ने आज कहा है कि वह जल्द ही फिर से इन मामलों पर सुनवाई के लिए 5 सदस्यीय संविधान पीठ का गठन करेगा। यह मामला भी 2018 से अदालत में लंबित है, लेकिन अब इसपर सुनवाई में तेजी आने की संभावना है। इस बेंच के कुछ जज बीच में रिटायर हो गए थे। 5 सदस्यीय नई संविधान पीठ गठित करने की बात सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने वकील अश्विनी उपाध्याय के अनुरोध पर कही है।

नई संविधान पीठ करेगी हलाला और बहुविवाह मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि वह मुसलमानों में बहुविवाह और निकाह हलाला की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के लिए 5 जजों वाली संविधान पीठ का गठन करेगा। याचिका में मुसलमानों की इन प्रथाओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। वकील अश्विनी उपाध्याय के अनुरोध पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अगुवाई वाली बेंच ने इसपर संज्ञान लिया है। उपाध्याय ने भी इस मामले में एक जनहित याचिका दायर की हुई है। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि क्योंकि पहले वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ के दो जज जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस हेमंत गुप्ता रिटायर हो चुके हैं। इसलिए नई पांच सदस्यीय बेंच गठित करने की आवश्यकता है।

सीजेआई ने कही नई बेंच गठित करने की बात
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, 'एक पांच-सदस्यीय बेंच के पास बहुत ही महत्वपूर्ण मामले लंबित पड़े हुए हैं। हम एक गठित करेंगे और इस मुद्दे को ध्यान में रखेंगे।' पिछले साल 2 नवंबर को ही उपाध्याय ने यह मामला अदालत के सामने उठाया था। पिछले साल 30 अगस्त को जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस हेमंत गुप्ता, जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सुधांशु धुलिया की पांच सदस्यीय बेंच ने इस मामले में दायर जनहित याचिकाओं को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC),राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM)को पार्टी बनाते हुए उनका जवाब मांगा था।

निकाह हलाला और बहुविवाह को गैर-कानूनी घोषित करने की हुई है मांग
लेकिन, बाद में जस्टिस बनर्जी पिछले साल 23 सितंबर को और जस्टिस गुप्ता 16 अक्टूबर को रिटायर हो गए थे। इसके बाद मुसलमानों में बहुविवाह और निकाह हलाला की परंपरा के खिलाफ कम से कम 8 याचिकाओं की सुनवाई के लिए नए सिरे से संविधान पीठ गठन करने की आवश्यकता बढ़ गई। उपाध्याय ने अपनी ओर से दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मुसलमानों में बहुविवाह और निकाह हलाला जैसी प्रथा को असंवैधानिक और गैर-कानूनी घोषित करने की मांग की हुई है।

क्या है निकाह हलाला ?
बहुविवाह प्रथा के तहत मुसलमान पुरुषों को चार-चार पत्नियां रखने की अनुमति है। जबकि, निकाह हलाला वह परंपरा है, जिसमें यदि कोई मुस्लिम महिला तलाक के बाद अपने शौहर से दोबारा निकाह करना चाहती है तो उसे पहले एक दूसरे मर्द के साथ निकाह करना जरूरी है। जब उसका दूसरा पति उसे पत्नी की तरह रखने के बाद तलाक दे देता है, तभी वह अपने पहले शौहर के साथ दोबारा निकाह कर सकती है। मुसलमानों की इसी प्रथा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
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ट्रिपल तलाक गैर-कानूनी घोषित है
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के जुलाई में ही इन याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था और इस तरह के दूसरे लंबित मामलों की सुनवाई करने वाली संविधान पीठ को सुनवाई के लिए सौंप दिया था। मुसलमानों में पहले ट्रिपल तलाक या इंस्टेंट तलाक या तलाक-ए-बिद्दत की कुप्रथा थी। इसको लेकर कई महिला संगठन आवाज उठा रहे थे। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त, 2017 को इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया। इसी आधार पर 19 सितंबर, 2018 को केंद्र सरकार ने ट्रिपल तलाक को अध्यादेश लाकर प्रतिबंधित कर दिया। फिर बाद में संसद के दोनों सदनों से पास कर मुस्लिम महिला (विवाह संरक्षण का अधिकार) कानून, 2019 लागू करके इसे गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। (इनपुट-पीटीआई)












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