सुप्रीम फैसला: शरीयत कानून को मंजूरी नहीं, फतवे मानने पर नहीं होगी बाध्यता

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कानूनी जामा पहनाने के लिए यह मांग उठ रही थी कि फतवों व शरीयत कानूनों के लिए सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ता की दलील थी कि जो फतवे जारी किए जाते थे उन्हें मान्यता मिले व शरीयत कानून को अदालतों की तरह ही कानूनी अधिकार दिए जाएं।
इसके पीछे दलील दी जा रही थी कि इससे अदालतों का बोझ कम होगा। सर्वोच्च न्यायिक संस्था ने इस दलील को ठुकराते हुए कहा है कि शरीयत कानून व फतवे अवैध नहीं हैं पर इन्हें मानने के लिए किसी को भी बाध्य ना किया जाए। ये कोई कानून नहीं हैं और ना ही इसे सामाजिक लोकतंत्र में प्रभावित किया जा सकता है।












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