गोवा में वन भूमि विवाद, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कांग्रेस ने उठाए सवाल

गोवा में निजी वन भूमि के रूपांतरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि रियल एस्टेट क्षेत्र को फायदा पहुंचाने के लिए पर्यावरण नियमों को नजरअंदाज किया।

यह विवाद 2021 में गठित 'रिव्यू कमेटी (RC-II)' से जुड़ा है, जिसने 271 सर्वे नंबरों को 'वन भूमि' की श्रेणी से बाहर कर दिया। इससे 1.2 करोड़ वर्ग मीटर से अधिक जमीन विकास के लिए खुल गई। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: अस्थायी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने गोवा की निजी वन भूमि के रूपांतरण पर अस्थायी रोक लगा दी है। इससे पहले, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी साफ कहा था कि जब तक भूमि का भौतिक सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक विकास कार्य नहीं होने चाहिए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुख्यमंत्री का फोकस इन जमीनों को रियल एस्टेट विकास के लिए खोलने पर है। उन्होंने RC-II की प्रक्रिया की जांच और विवादित प्लॉट्स पर विकास कार्यों पर रोक लगाने की मांग की है।

सांकोले का विवादित प्लॉट: सवालों के घेरे में

इस मामले में सांकोले के सर्वे नंबर 257/1 को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं। इस प्लॉट पर एक बड़ा कमर्शियल प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। कांग्रेस का आरोप है कि RC-II की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और इसे ठीक से लागू नहीं किया गया। पार्टी ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से जवाबदेही तय करने की मांग की है, क्योंकि उस समय वे वन विभाग भी संभाल रहे थे। यह मामला अब राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस का केंद्र बन गया है।

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