फिल्म पद्मावत से 'जौहर' का सीन हटाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

नई दिल्ली। इस साल जनवरी में आई संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत से नायिका के जौहर करने के दृश्य को हटाए जाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि क्या याचिकाकर्ता को लगता है कि फिल्म में किसी को सती होते देख कोई महिला सती हो जाएगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्हें नहीं लगता फिल्म के सीन से सती प्रथा को कोई मान लेगा क्योंकि अब जमाना बदल गया है और महिलाएं आज काफी सशक्त हैं। स्वामी अग्निवेश ने कोर्ट में ये याचिका दायर करते हुए कहा था कि फिल्म में कुछ सीन सती प्रता को बढ़ावा देने वाले हैं, जिन्हें हटाया जाना चाहिए।

Supreme Court dismissed Swami Agnivesh plea seeking to ban Padmaavat Sati scene

स्वामी अग्निवेश ने फिल्म 'पद्मावत' के किछ दृश्यों को सती प्रथा प्रिवेंशन एक्ट 1987 का उल्लंघन बताया था। उन्होंने कहा था फिल्म में प्रिवेंशन एक्ट का खुलेआम उल्लंघन है और पद्मावत में सती प्रथा को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने इसके लेकर पुलिस में भी शिकायत की थी और फिल्म के खिलाफ हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया था। इसके बाद स्वामी अग्निवेश ने फिल्म के निर्माता पर कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

स्वामी का कहना है कि सती प्रथा के खिलाफ कई जन-संगठनों ने एक जोरदार आंदोलन चलाया था, जिसके बाद इसे खत्म किया गया। बाद में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सती प्रथा प्रिवेंशन एक्ट को संसद में पारित कर कानून की शक्ल दी थी। इस एक्ट के तहत महिला उत्पीड़न को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए। वहीं पद्मावत ने एक बार फिर से सती प्रथा जैसी कुरीतियों को हवा दे दी है। फिल्म में जिस प्रकार से सती प्रथा का महिमामंडन किया गया है, उससे रूढ़िवादी विचारों को बल मिला है।

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