चिन्मयानंद केस: सुप्रीम कोर्ट ने SIT गठन के दिए निर्देश, छात्रा और परिजनों को सुरक्षा के आदेश
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नई दिल्ली। भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर शोषण के आरोपों के मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह पीड़िता को किसी अन्य कॉलेज में शिफ्ट करें। बताते चलें कि इस मामले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और पूर्व मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर लॉ कॉलेज की छात्रा का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिये कि वह शाहजहांपुर की एलएलएम छात्रा द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिये आईजी-रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित करे। कोर्ट ने कहा कि एसआईटी में पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी भी होंगे और वह महिला की शिकायतों को देखेगी। इसके अलावा हाईकोर्ट को निर्देश दिए गए हैं कि वह मामले की मॉनिटरिंग के लिए एक बेंच का गठन करे।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा कि वह महिला, उसके भाई का दाखिला दूसरे संस्थान में कराए क्योंकि उन्हें चिन्मयानंद के ट्रस्ट द्वारा संचालित कॉलेज में पढ़ने में डर है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि मामले में दर्ज की गईं दो क्रॉस एफआईआर की जांच की निगरानी के लिए एक पीठ गठित करें। अदालत ने उप्र के मुख्य सचिव को निर्देश दिए किए अगले आदेश तक छात्रा और उसके परिजनों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
गौरतलब है कि लॉ की 23 साल की इस छात्रा ने 24 अगस्त को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उसने पूर्व केंद्रीय मंत्री पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने पीड़िता समेत कई लड़कियों का यौन शोषण किया है। उसने यह भी दावा किया कि उसके पास इसके सबूत हैं। वह 23 अगस्त को हॉस्टल से लापता हो गई थी और इसके बाद 30 अगस्त को राजस्थान में एक युवक के साथ मिली थी। छात्रा के पिता ने स्वामी चिन्मयानंद पर अपहरण और जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज कराया था।












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