बीआरएस नेता के कविता की जमानत के केस में सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट की आलोचना के मायने?
Supreme Court news: दिल्ली शराब घोटाले में 5 महीने से तिहाड़ जेल में बंद भारत राष्ट्र समिति (BRS) की नेता के कविता को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी और उन्हें भ्रष्टाचार के साथ-साथ मनी लॉन्ड्रिंग केस में भी जमानत मिल गई। लेकिन, कविता को बेल देते वक्त सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले की जिस तरह से खिंचाई की है, उसके दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने बीआरएस नेता को बेल देते वक्त यह तर्क दिया है कि इस मामले में ट्रायल जल्द पूरी होने की उम्मीद नहीं है और विचाराधीन को अभियुक्त की तरह सजा नहीं मिलनी चाहिए।

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने बीआरएस नेता की बेल याचिका खारिज किए जाने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को सख्ती से नामंजूर कर दिया है। हाई कोर्ट ने पीएमएल ऐक्ट की धारा 45 के तहत उनकी याचिका खारिज की थी, जिसमें अन्य श्रेणियों के अलावा महिलाओं को जमानत देने की विशेष व्यवस्था है।
अदालतें उपश्रेणी नहीं बना सकतीं- सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कविता 'उच्च शिक्षित और निपुण' हैं, उन्हें 'कमजोर महिला' वाले प्रावधान का लाभ नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालतें उपश्रेणी नहीं बना सकतीं, जबकि प्रावधान में सिर्फ 'महिला' का जिक्र है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले पर जिस तरह की टिप्पणी की है, उससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि उससे (हाई कोर्ट) कहीं न कहीं प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 45 की व्याख्या करने में कुछ त्रुटि रह गई है।
लाइव लॉ डॉट इन के मुताबिक इसी साल फरवरी में एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि हाई कोर्ट भी संवैधानिक न्यायालय हैं और यह सुप्रीम कोर्ट के अधीन नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट के विचारों से कविता को मिला फायदा
इससे पहले 1 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने अन्य आधारों के अलावा कविता की बेल इस वजह से खारिज कर दी थी कि वह 'सुशिक्षित' महिला हैं और उन्हें 'कमजोर' नहीं माना जा सकता, इसलिए उनपर अपवाद नहीं लागू होगा। ट्रायल कोर्ट ने भी कानून की यही व्याख्या करते हुए उनकी जमानत अर्जी खारिज की थी।
बार एंड बेंच के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 'अगर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को कानून बनने दिया गया.....इस प्रतिकूल टिप्पणी का मतलब यह होगा कि कोई भी शिक्षित महिला जमानत नहीं पा सकेगी।'
पीएमएलए की धारा 45 में बेल का क्या प्रावधान है?
पीएमएलए की धारा 45 में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में जमानत का प्रावधान है। इसमें यह जिम्मेदारी आरोपी की है कि वह जमानत मांगते समय यह साबित करे कि उसके खिलाफ प्रथमदृष्ट्या कोई केस नहीं है।
हालांकि, अगर कोई व्यक्ति 16 साल से कम उम्र का है, महिला है, बीमार या कमजोर है और विशेष अदालत को लगता है त उसे जमानत पर रिहा किया जा सकता है तो वह ऐसा निर्देश दे सकता है। आईपीसी में भी महिलाओं और बच्चों के लिए इसी तरह से अपवाद मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि कविता को कबतक जेल में रखा जाएगा, क्योंकि ट्रायल में बहुत लंबा समय लगने वाला है। ऐसे में सर्वोच्च अदालत को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ट्रायल ज्यादा लंबे समय तक अटका न रह जाए।
क्योंकि, अगर भ्रष्टाचार और घोटाले के किसी आरोपी को दोषी साबित होने तक जमानत पर छूटने का अधिकार है तो जो गुनहगार है उसे कानून के अनुसार उचित सजा दिलाना भी न्यायिक व्यवस्था की ही जिम्मेदारी है।












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