कोर्ट ने मोबाइल नंबर को 'आधार' से जोड़ने के निर्देश नहीं दिए, फिर सर्कुलर में कैसे: SC
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नई दिल्ली। सिम कार्ड को आधार नंबर से जोड़ने के मामले में बुधवार को नया मोड़ आ गया। जब इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार विभाग पूछा कि, सिम से जोड़ने का कोई आदेश जारी नहीं किया लेकिन आपने सर्कुलर में कहा गया कि यह कोर्ट का आदेश है? जस्टिस सीकरी और जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट ने ये आदेश जारी नहीं किया था।

उच्चतम न्यायालय ने मोबाइल फोन को आधार से अनिवार्य रूप से जोड़ने के सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किये और कहा कि उपयोगकर्ताओं के अनिवार्य सत्यापन पर उसके पिछले आदेश को औजार के रूप में प्रयोग कर रही है। भारत की विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के पक्ष के वकील वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि, सर्वोच्च न्यायालय ने केवल इतना ही कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं का सत्यापन किया जाना चाहिए।
बेंच के सदस्य जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह का कोई ऑर्डर जारी ही नहीं किया। लेकिन आपने इसे मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए आधार अनिवार्य बनाने के उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया। पीठ ने कहा, आप ( दूरसंचार विभाग ) सेवा प्राप्त करने वालों के लिए मोबाइल फोन से आधार को जोड़ने के लिए शर्त कैसे लगा सकते हैं? पीठ ने कहा कि लाइसेंस समझौता सरकार और सेवा प्रदाताओं के बीच है।
वहीं यूआईडीएआई की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि टेलिकॉम विभाग की अधिसूचना ई केवाईसी के जरिये मोबाइल फोनों के फिर से वेरिफिकेशन की बात करती है। और टेलीग्राफ कानून सर्विस प्रोवाइडर की लाइसेंस स्थितियों पर फैसले के लिए केन्द्र सरकार को विशेष शक्तियां देता है।












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