Video-डिडिटल इंडिया के दौर में नाव से नदी पार होती है बाइक
सुल्तानपुर। देश डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं की राह देख रहे हैं। सुल्तानपुर के पापरघाट गांव में जब आप पहुंचेंगे तो आधुनिक भारत की असली तस्वीर आपको देखने को मिलेगी।
पापरघाट गांव से गोमती नदी होकर निकलती है जिसे पार करने के लिए सरकार ने काफी लंबी मांग के बाद स्वीकृति दी थी। लेकिन वोटबैंक की राजनीति के चलते यह पुल पिछले तकरीबन 6 साल से अधूरा पड़ा है। यहां आज भी लोग नाव के जरिए नदी पार करने को मजबूर है। यही नहीं अकस्मात स्थिति में भी लोगों के पास नाव के अलावा कोई और विकल्प नहीं। लोग अपने वाहनों को भी नाव पर रखकर नदी पार करते हैं।
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शाम होने के बाद लोगों के पास नदी पार करने का कोई भी साधन मौजूद नहीं है। नाव चालक नदी पार करने के हर व्यक्ति से 8 रुपए लेता है जबकि बाइक के लिए भी लोगों को 8 रुपए ही देने होते हैं। हर रोज यहां नाव से सैकड़ों लोग नदी पार करने को मजबूर हैं। इलाके के लोग बताते हैं कि यह भाजपा सांसद वरुण गांधी का संसदीय क्षेत्र है जबकि अरुण वर्मा यहां के स्थानीय विधायक हैं जोकि समाजवादी पार्टी से विधायक हैं।
बहरहाल लोग आज भी एक अदद पुल के तैयार होने का रास्ता देख रहे हैं। वहीं नाव वाले का कहना है कि नदी पर नाव चलाने के लिए उसे बोली में तकरीबन 2.5 लाख रुपए से लेकर 3 लाख रुपए देना पड़ता है।

गांव तक पहुंचने का एक मात्र रास्ता
सुल्तानपुर शहर से गांव तक पहुंचने का यह एक मात्र रास्ता है।

नाव चलाने के लिये रस्सी का इस्तेमाल
जिस दिन यह रस्सी टूट जाती है, उस दिन इस गांव तक जाने का रास्ता बंद।

आदी हो चुके लोग
पुलिस की नींव पड़ी, खंभे बने, पर पुल नहीं।

कब बनेगा पुल
काम की रफ्तार को देखते हुए तो लग रहा है कि यह पुल 2017 तक भी नहीं बनेगा।

किस बात का वोट
नेताओं से सिर्फ एक सवाल पूछना चाहेंगे, अगर सुविधाएं नहीं तो वोट किस बात का।












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