कौन थे स्क्वाड्रन लीडर अनुज, फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश? Sukhoi Crash में मौत, घर में चल रही शादी की तैयारी
Sukhoi-30 Plane Crash (Sqn Ldr Anuj and Flt Lt Purvesh Duragkar): असम के कार्बी आंगलोंग जिले में भारतीय वायुसेना का सुखोई-30MKI लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से दो जांबाज पायलटों की मौत हो गई। इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर अनुज वशिष्ठ और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर शहीद हो गए। भारतीय वायुसेना ने दोनों अधिकारियों के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि इस कठिन समय में वायुसेना उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।
यह हादसा तब हुआ जब फाइटर जेट एक नियमित मिशन पर उड़ान भर रहा था और अचानक उसका संपर्क रडार से टूट गया। बाद में देर रात खोजी दलों को पहाड़ी और घने जंगल वाले इलाके में विमान का मलबा मिला।

रडार से अचानक गायब हुआ फाइटर जेट (Sukhoi-30 Crash Incident)
गुरुवार 05 मार्च को वायुसेना का सुखोई-30MKI लड़ाकू विमान असम के कार्बी आंगलोंग जिले के ऊपर उड़ान भर रहा था। उड़ान के दौरान अचानक विमान का संपर्क ग्राउंड कंट्रोल से टूट गया।
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी के मुताबिक, विमान एक रूटीन मिशन पर था। संपर्क टूटने के बाद एयरफोर्स ने तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और ग्रामीणों की मदद से सर्च एंड रेस्क्यू टीमों ने देर रात करीब 1 बजे विमान का मलबा खोज निकाला।
कौन थे स्क्वाड्रन लीडर अनुज वशिष्ठ (Squadron Leader Anuj Vashisth)
इस हादसे में जान गंवाने वाले स्क्वाड्रन लीडर अनुज वशिष्ठ हरियाणा के गुरुग्राम के सेक्टर-22 के निवासी थे। उनके पिता आनंद कुमार भारतीय सेना में सुबेदार रह चुके हैं।
परिवार के मुताबिक अनुज ने करीब 10 साल पहले भारतीय वायुसेना जॉइन की थी। वह बेहद प्रतिभाशाली और समर्पित अधिकारी माने जाते थे।
सबसे दर्दनाक बात यह है कि उनके घर में इन दिनों शादी की तैयारियां चल रही थीं। रिश्तेदारों का आना-जाना लगा था और परिवार खुशी के माहौल में शादी की तैयारियों में जुटा था। लेकिन विमान हादसे की खबर आते ही पूरा घर मातम में डूब गया।

कौन थे फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर (Flight Lieutenant Purvesh Duragkar)
फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर भारतीय वायुसेना के युवा फाइटर पायलटों में गिने जाते थे। वह सक्रिय रूप से ऑपरेशनल ट्रेनिंग और मिशनों में हिस्सा ले रहे थे।
पुरवेश नागपुर के रहने वाले हैं। पुरवेश के पिता रविंद्र दुरागकर के लिए अब बेटे की सिर्फ यादें ही बची हैं। नागपुर के न्यू सुभेदार लेआउट में रहने वाले रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी रविंद्र दुरागकर को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उनका 28 साल का बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। भारतीय वायुसेना के अधिकारी जब उनके घर पहुंचे और उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे, तब भी पिता बार-बार बेटे की यादों में खो जा रहे थे।
रविंद्र दुरागकर ने बताया कि उनकी बेटे से आखिरी बार होली के दिन को फोन पर बात हुई थी। उन्होंने नम आंखों से कहा, "हमारी बुधवार (4 मार्च) को बात हुई थी। उसके ग्रुप कैप्टन ने ही हमें फोन करके हादसे की जानकारी दी।"

'मेरा बेटा भारतीय वायुसेना का हिस्सा होने पर बहुत गर्व महसूस करता था'
पिता बताते हैं कि पुरवेश को फाइटर जेट उड़ाने पर बहुत गर्व था। वह कभी-कभी घरवालों को बताता था कि वायुसेना के विमान कितनी तेज रफ्तार से उड़ते हैं और कैसे मिशन पूरे किए जाते हैं। रविंद्र दुरागकर कहते हैं, "मेरा बेटा भारतीय वायुसेना का हिस्सा होने पर बहुत गर्व महसूस करता था। वह अपने साथियों की भी बहुत इज्जत करता था।"
पुरवेश हाल ही में घर आया था। करीब दस दिन पहले वह अपनी बहन के साथ परिवार के एक कार्यक्रम में शामिल होने नागपुर पहुंचा था। पड़ोसियों का कहना है कि पुरवेश की बहन अमेरिका में रहती है और वह भी उसी पारिवारिक समारोह में आई थी।
पिता ने बताया कि पुरवेश की पोस्टिंग असम के तेजपुर में थी, लेकिन वहां रनवे पर काम चल रहा था, इसलिए वह इन दिनों जोरहाट एयरबेस से ऑपरेट कर रहा था। हादसे वाले दिन भी वह एक ट्रेनिंग मिशन पर था।
रविंद्र दुरागकर की आवाज भर्रा जाती है जब वह कहते हैं, "वह हमेशा देश के लिए कुछ करने की बात करता था। उसे उड़ान से बेहद प्यार था।" परिवार को उम्मीद है कि शाम तक पुरवेश का पार्थिव शरीर नागपुर पहुंच जाएगा। लेकिन एक पिता के लिए यह भरोसा करना बेहद मुश्किल है कि जिस बेटे से दो दिन पहले बात हुई थी, वह अब सिर्फ यादों में ही रह गया है
कितना ताकतवर है सुखोई-30MKI (Sukhoi-30MKI Fighter Jet)
सुखोई-30MKI भारतीय वायुसेना के सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमानों में शामिल है। यह दो सीट वाला लंबी दूरी का मल्टीरोल फाइटर जेट है। इसे रूस की सुखोई कंपनी ने विकसित किया और भारत में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इसके निर्माण में सहयोग करती है।
भारतीय वायुसेना के पास ऐसे 260 से अधिक विमान हैं, जिनका इस्तेमाल एयर डिफेंस, लंबी दूरी की स्ट्राइक और निगरानी मिशनों में किया जाता है।
सुखोई-30MKI की खासियत
| फीचर | जानकारी |
|---|---|
| विमान का प्रकार | मल्टीरोल फाइटर जेट |
| इंजन | ट्विन इंजन |
| अधिकतम गति | लगभग 2100 किमी/घंटा |
| रेंज | लगभग 3000 किमी |
| निर्माता | सुखोई (रूस) / HAL भारत |
| भूमिका | एयर डिफेंस, स्ट्राइक मिशन, निगरानी |
| अनुमानित कीमत | करीब 350-400 करोड़ रुपये प्रति विमान |
सुखोई-30 कब-कब हुआ हादसे का शिकार (Sukhoi Crash History)
भारतीय वायुसेना का यह फाइटर जेट बेहद भरोसेमंद माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसके कुछ हादसे भी सामने आए हैं।
- 4 जून 2024, नासिक - ट्रेनिंग उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी से विमान खेत में गिरा, दोनों पायलट सुरक्षित निकले।
- 28 जनवरी 2023, मध्य प्रदेश - SU-30MKI और मिराज-2000 की हवा में टक्कर, SU-30 के पायलट सुरक्षित।
- 8 अगस्त 2019, तेजपुर (असम) - टेक-ऑफ के बाद तकनीकी समस्या, दोनों पायलट बच गए।
- 27 जून 2018, नासिक - टेस्ट फ्लाइट के दौरान दुर्घटना, पायलट सुरक्षित।
- 23 मई 2017, अरुणाचल प्रदेश - विमान का मलबा पहाड़ी इलाके में मिला, दोनों पायलटों की मौत।
- 15 मार्च 2017, बाड़मेर - ट्रेनिंग मिशन में क्रैश, पायलट सुरक्षित।
- 4 अक्टूबर 2014, पुणे - ट्रेनिंग फ्लाइट के दौरान हादसा, पायलट बच गए।
- 9 मई 2015, तेजपुर - तकनीकी खराबी के बाद पायलटों ने इजेक्ट कर जान बचाई।
देश ने खो दिए दो बहादुर पायलट
असम में हुए इस हादसे ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है। एक ओर जहां स्क्वाड्रन लीडर अनुज के घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, वहीं दूसरी ओर देश सेवा करते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर भी अपने करियर की शुरुआत में ही देश के लिए शहीद हो गए। भारतीय वायुसेना ने कहा है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। दोनों वीर पायलटों की शहादत ने यह याद दिला दिया कि देश की सुरक्षा के लिए आसमान में उड़ने वाले ये जांबाज हर पल खतरे से जूझते हैं।
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