सुशांत केस: सुब्रमण्यम स्वामी का दावा, महाराष्ट्र सरकार के लिए वाटरलू साबित होगा
नई दिल्ली- भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत को लेकर रोजाना हो रहे खुलासों के बीच रविवार को एक बहुत बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि यह केस आखिरकार महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस समेत बॉलीवुड के लिए भी वाटरलू और वॉटरगेट साबित होने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जबतक सुशांत को न्याय नहीं मिल जाता तबतक चुप नहीं बैठेंगे। गौरतलब है कि इस केस की सीबीआई जांच की मांग करने वालों में वे सबसे आगे रहे हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पहले ही इसके लिए खत लिखकर मांग कर दी थी। उन्होंने हाल ही में यहां तक दावा किया था कि सुशांत के शव को ले जाने वाले एंबुलेंस अटेंडेंट ने जो चीजें देखी हैं, उसके आधार पर अगर कूपर अस्पताल में पोस्टमॉर्टम करने वाले पांचों डॉक्टरों से पूछताछ की जाए तो यह केस पूरी तरह से साफ हो जाएगा।

बॉलीवुड,मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार को लेकर बड़ा दावा
भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने सुशांत की संदिग्ध मौत को हत्या करार दिया है। अब उन्होंने इस केस को लेकर बॉलीवुड, मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ बहुत ही गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने दावा किया है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत इन सबके लिए वाटरलू और वाटरगेट साबित होगा। उन्होंने ट्विटर पर लोगों से कहा है कि जबतक सुशांत को न्याय नहीं मिल जाता और गुनहगार को सजा नहीं मिल जाती है, वह इस मसले को छोड़ने वाले नहीं हैं। इससे पहले भाजपा नेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर पैदा हो रहे कई तरह के संदेहों के बारे में अपने तर्क दे चुके हैं और मुंबई पुलिस की थ्योरी पर गंभीर प्रश्चन चिन्ह खड़े किए हैं। गौरतलब है कि स्वामी इस केस की सीबीआई जांच की वकालत करने वाले सबसे पहले शख्सियतों में शामिल रहे हैं, जिसको महाराष्ट्र सरकार अबतक टालने की हर कोशिश करती रही है। गौरतलब है कि स्वामी ही वे शख्सियत हैं, जिन्होंने सुशांत के शव और उनके कमरे में मौजूद सबूतों में से 26 प्वाइंट उठाकर बताया था कि उनके मुताबिक 26 में से 24 प्वाइंट उनकी हत्या की ओर इशारा करते हैं और बाकी सिर्फ दो ही सुसाइड की ओर संदेह जताते हैं।
'महाराष्ट्र सरकार के लिए वाटरलू साबित होगा सुशांत केस'
रविवार को स्वामी ने ट्वीट किया कि, 'सुशांत सिंह राजपूत की हत्या बॉलीवुड, मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार के लिए वाटरलू और वॉटरगेट है। अपनी कमर कस लीजिए, जैसे कि हम हैं। हम उड़ान भरने वाले और bombard करने वाले हैं और तबतक हार नहीं मानेंगे जबतक या तो दोषी को सजा नहीं मिल जाती या दोषियों को सजा न मिल जाय।' गौरतलब है कि शुक्रवार को स्वामी ने सुशांत के नौकर सैमुअल के गायब होने और उनकी मौत के बाद दो एंबुलेंस पहुंचने को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने ट्वीट किया था, 'दो एंबुलेंस क्यों थे? उन्हें किसने बुलाया था? अगर मुझे सवालों का सच जवाब नहीं मिलता तो हमें एक सुराग मिल सकता है कि सुशांत सिंह राजपूत का वफादार नौकर सैमुअल क्यों गायब है। क्या वह जिंदा है या उसकी मौत हो चुकी है? क्या एक एंबुलेस उसी के लिए लाया गया था?'

सुप्रीम कोर्ट जो कहेगा वो मानेंगे- महाराष्ट्र के गृहमंत्री
उधर, सुशांत की मौत के अगले ही दिन शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देकर ही इस केस में आत्महत्या की ओर इशारा करने वाले महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सीबीआई जांच को लेकर महाराष्ट्र सरकार का सुर थोड़ा सा ढीला किया है। देशमुख ने कहा है कि इस केस में अब महाराष्ट्र सरकार वही करेगी, जैसा सुप्रीम कोर्ट कहेगा। महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने कहा है, 'सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सभी पार्टियों ने एफिडेविट दायर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट इस केस में अगले हफ्ते अपना फैसला सुनाएगा और तब हम उसी के मुताबिक काम करेंगे।' गौरतलब है कि 15 जून, 2020 को ही देशमुख ने दावा कर दिया था कि 'पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट कहता है कि सुशांत सिंह राजपूत ने खुद से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।' ये दावा तब किया गया था, जब विस्तृत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई भी नहीं थी।
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जांच में कमियों के चलते संदेह के घेरे में मुंबई पुलिस
बता दें कि 14 जून को बांद्रा वाले फ्लैट में सुशांत सिंह राजपूत का संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने के बाद ही मुंबई पुलिस ने तत्काल ही इसके आत्महत्या के ऐंगल पर जोर देना शुरू कर दिया था। जबकि, उनके कमरे में तभी से कई चीजें साजिश की ओर इशारा भी कर रही थीं। आरोपों के मुताबिक मुंबई पुलिस ने अपनी जांच का फोकस भी सुशांत के कमरे और उनके साथ मौजूद लोगों से ज्यादा बॉलीवुड की बड़ी हस्तियों से बिना एफआईआर दर्ज कराए बयान लेने पर किया। बाद में जब ये तथ्य सामने आए कि मुंबई पुलिस ने तीन हफ्ते तक फोरेंसिक जांच को लटका दिया था। यही नहीं एंबुलेंस अटेंडेंट ने सुशांत के पैर मुड़े हुए देखने और शरीर पीले पड़ने के साथ ही, न तो आंख या जीभ बाहर निकलने और ना ही मुंह से झाग निकलने का दावा किया है। इसके बाद मुंबई पुलिस और राज्य सरकार के दावे संदेहों के घेरे में आ चुके हैं। बहरहाल, अब सबकुछ सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर है कि वह सीबीआई जांच को ही आगे बढ़ाने की इजाजत देता है या फिर उसे भी कथित रूप से खुद को स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस होने का दावा करने वाली मुंबई पुलिस की जांच पर ही भरोसा है।












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