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Shubhanshu Shukla धरती पर सकुशल लौटे, मां की आंखों से छलके गर्व के आंसू, अमेरिका से भारत तक जश्न

Shubhanshu Shukla Returns Earth Safely: भारत के लिए गर्व का क्षण आ गया है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, जो कि 20 दिन अंतरिक्ष में और 18 दिन अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर बिताकर सकुशल लौट गए हैं। आज 15 जुलाई 2025 को दोपहर करीब 3 बजे कैलिफोर्निया के समुद्र में सफल स्प्लैशडाउन के जरिए धरती पर वापस लौटे।

शुभांशु शुक्ला के लौटने की तैयारी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए NASA और Axiom Space ने हर कदम पर निगरानी और योजना बनाई है। पूरे देश की निगाहें आज इस ऐतिहासिक क्षण पर टिकी हैं, जब भारत का एक और बेटा अंतरिक्ष से वापसी कर इतिहास में अपना नाम दर्ज करेगा।

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शुभांशु शुक्ला की वापसी को लेकर उनके लखनऊ स्थित घर में सुंदरकांड पाठ, मंदिरों में प्रार्थनाएं और पूरे देश में गौरव की भावना देखी जा रही है।

कैसे हुई धरती पर वापसी: आठ चरणों की रोमांचक यात्रा

शुभांशु शुक्ला की धरती पर वापसी आठ चरणों में होगी। सोमवार शाम करीब 4:45 बजे उनका यान, जो Axiom-4 मिशन के तहत ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट है, अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से अलग हुआ। इसके बाद चरणबद्ध प्रक्रिया शुरू हुई:

अनडॉकिंग (Un-Docking): ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट आईएसएस से अलग हुआ।

इंजन बर्न (Engine Burn): शाम 5:11 बजे थ्रस्टर्स को दागा गया ताकि यान की गति धीमी हो सके - यह प्रक्रिया 'डी-ऑर्बिट बर्न' कहलाती है।

हीट शील्ड एक्टिवेशन: मंगलवार सुबह 7:30 बजे यान के हीट शील्ड को तैयार किया गया, जो वायुमंडल में घर्षण से पैदा हुई ऊष्मा से यान को बचाता है।

वायुमंडल में प्रवेश: दोपहर करीब 1:30 बजे, कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया।

1 1:45 से 2:30 बजे के बीच यान वायुमंडल में बेहद तेज़ी से यात्रा करते हुए, जिससे हीट शील्ड का तापमान 1600°C तक पहुंचा।

पैराशूट चरण: धरती की सतह से 5.7 किमी ऊपर पहला पैराशूट खुलेगा, और जब यान 2 किमी ऊपर रह जाएगा, तब दूसरा पैराशूट खुलेगा।

स्प्लैशडाउन: दोपहर 3 बजे, ड्रैगन कैप्सूल कैलिफोर्निया के समुद्र में सुरक्षित रूप से उतरेगा।

रिकवरी ऑपरेशन: कैप्सूल के उतरते ही रेस्क्यू टीमें उसे रिकवर करेंगी और अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालेंगी।

शुभांशु की वापसी पर पूरे देश में खुशी की लहर

शुभांशु शुक्ला की वापसी को लेकर लखनऊ स्थित उनके घर में धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। उनकी मां आशा शुक्ला ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए बताया कि, सुबह मंदिर गए और भगवान हनुमान के दर्शन किए। हमने सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया है। हम बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। हमारा बेटा देश का नाम रोशन कर रहा है।"

वहीं, उनके पिता शंभु दयाल शुक्ला ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "शुभांशु ने जो किया है, वह इतिहास में दर्ज होगा। वह सिर्फ हमारा बेटा नहीं, पूरे भारत का बेटा है। हम सभी देशवासियों के आभारी हैं, जो उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।"

क्यों होता है स्प्लैशडाउन समुद्र में?

यहां ये जाना जरूरी है कि आखिर क्यों अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी समुद्र में ही कराई जाती है। NASA की गाइडलाइन के मुताबिक, पानी एक प्राकृतिक कुशन की तरह काम करता है। समुद्र में लैंडिंग से अंतरिक्ष यात्रियों पर पड़ने वाला बल कम हो जाता है और यह प्रक्रिया जमीनी लैंडिंग से कहीं अधिक सुरक्षित मानी जाती है। इस पानी में उतरने की प्रक्रिया को स्प्लैशडाउन (Splashdown) कहा जाता है।

वापसी के बाद की प्रक्रिया: 7 दिन का आइसोलेशन और मेडिकल जांच

स्प्लैशडाउन के बाद, शुभांशु शुक्ला और उनके साथी अंतरिक्ष यात्रियों को 7 दिन के लिए आइसोलेशन में रखा जाएगा। क्योंकि उन्होंने 18 दिन शून्य गुरुत्वाकर्षण में बिताए हैं, इसलिए उन्हें पृथ्वी के वातावरण से सामंजस्य स्थापित करने में समय लगेगा।

इन दिनों में:

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति की जांच करेंगे
  • मांसपेशियों और हड्डियों पर पड़े प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा
  • अंतरिक्ष यात्रा के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा
  • भारत लौटने से पहले उन्हें कई मेडिकल और साइकोलॉजिकल परीक्षणों से गुजरना होगा।

Shubhanshu Shukla: देश के लिए गौरव का पल

शुभांशु शुक्ला की यह ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि युवा भारत के लिए एक प्रेरणा है। अंतरिक्ष के विशाल अज्ञात में 20 दिन बिताकर और सफलतापूर्वक वापसी कर शुभांशु ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत का युवा वैश्विक मंच पर अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

15 जुलाई 2025 न केवल विश्व युवा कौशल दिवस के रूप में विशेष है, बल्कि इस दिन शुभांशु शुक्ला जैसे साहसी भारतीय की धरती पर वापसी भी इस तिथि को गौरवशाली बना देती है। यह मिशन भारत के अंतरिक्ष इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। देश के लिए यह गर्व और भावनाओं से भरा दिन है - जब हर माता-पिता, हर युवा, और हर भारतीय को शुभांशु में अपना अक्स दिखाई देता है।

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