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पंजाब के जिस वैक्स म्यूजियम की तस्वीरों का लोगों ने उड़ाया मजाक, उसे बनाने वाले शख्स की है दिल छूने वाली कहानी

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नई दिल्‍ली। पंजाब के लुधियाना के एक वैक्‍स म्‍यूजियम की तस्‍वीरें इंटरनेट पर सुर्खियों में हैं। इस वैक्स म्यूजियम में बराक ओबामा से लेकर अब्दुल कलाम, मदर टेरेसा से लेकर माइकल जैक्सन ,सलमान खान और सचिन तेंदुलकर जैसी हस्तियों के वैक्स स्टैच्यू लगाए गए हैं। इस म्‍यूजियम का नाम प्रभाकर वैक्‍स म्‍यूजियम है क्‍योंकि जिस सख्‍श ने इसे बनाया है उसका नाम चंद्रशेखर प्रभाकर (71) है। हाल ही में न्यूज एजेंसी एएनआई ने प्रभाकर वैक्स म्यूजियम की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसके बाद इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाओं ने इस वैक्स म्यूजियम के स्टैस्यू का खूब मजाक उड़ाया। किसी ने माइकल जैक्सन का पुतला देखकर कहा कि चलो मंगल पांडे का स्टैच्यू भी कहीं लगा दिया गया। ऐसा ही कुछ ओबामा, मोदी और कलाम के पुतलों के लिए कहा गया। लेकिन आईए इन सबसे अलग आपको चंद्रशेखर प्रभाकर के बारे में बताते हैं। यकीन मानिए इनकी कहानी दिल छू देने वाली है।

2005 में शुरू किया था स्‍टैच्‍यू बनाने का काम

2005 में शुरू किया था स्‍टैच्‍यू बनाने का काम

चंद्रशेखर प्रभाकर द्वारा बनाए गए इस वैक्‍स म्‍यूजियम में 52 पुतले हैं। इन सारे पुतलों को खुद प्रभाकर ने ही बनाया है। 71 साल के प्रभाकर ने 2005 में ये काम शुरू किया था। आपको बता दें कि प्रभाकर का अपना बिजनेस था, एक उम्र के बाद जब उनकी जिम्मेदारियां पूरी हो गईं तो उन्होंने शौक के लिए ये सारे पुतले बनाए। प्रभाकर का दिल का ऑपरेशन हुआ था जिसके बाद उन्‍होंने बिजनेस से खुद को अलग कर लिया।

अपनी जेब से उठाया पूरा खर्च

अपनी जेब से उठाया पूरा खर्च

प्रभाकर कहते हैं कि उन्हें पता है कि लोग उनका काम देखकर हंसेंगे। लेकिन उन्होंने कोई प्रोफेश्नल ट्रेनिंग नहीं ली है, वो सिर्फ फोटो देखकर बिना किसी नाप के ये वैक्स स्टैच्यू बनाते हैं। और ये उनका रिटायरमेंट के बाद का शौक है। इसके पीछे का सारा खर्च उन्होंने अपनी जेब से उठाया है। इसकी भरपाई के लिए वो 100 रुपए का टिकट लेते हैं।

लंदन के मैडम तुसाद म्‍यूजियम देखकर हुए प्रभावित

लंदन के मैडम तुसाद म्‍यूजियम देखकर हुए प्रभावित

साल 2000 में अपनी इंडस्ट्री में कैमिकल से गंभीर बीमार होने पर हार्ट सर्जरी हुई तो फैमिली ने उस काम से बचने और उम्र के लिहाज से आराम करने की सलाह दी। खाली बैठ नहीं पाए, लिहाजा लंदन गए तो मैडम तुसाद म्यूजियम देखकर वैसा ही कुछ करने की ठानी। उस म्यूजियम के संचालकों से अपने शहर में ब्रांच खोलने की बात की तो उन्होंने ऐसा नेगेटिव जवाब दिया कि दिल को ठेस लगी। फिर प्रभाकर ने अपने बलबूते वैसा ही म्यूजियम खोलने की ठानी।

बचपन में मिट्टी के खिलौने बनाने की कला काम आई

बचपन में मिट्टी के खिलौने बनाने की कला काम आई

बचपन में नानी से सीखी मिट्टी के खिलौने बनाने की कला काम आई और शहद की मक्खी द्वारा तैयार मोम से बुत बनाने लगे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का पहला बुत बनाने में एक साल लगा, फिर तो एक के बाद एक सौ से ज्यादा बुत बनाए। जज्बाती होकर कहने लगे कि उन ‘तुसाद वालों' का शुक्रिया, उनकी वजह से ही अब प्रभाकर वैक्स म्यूजियम की एक ब्रांच शहर के सबसे महंगे पैवेलियन मॉल में भी खुल चुकी है। थिएटर आर्टिस्ट रहे प्रभाकर कभी आप सांसद भगवंत मान के साथ दूरदर्शन के लिए प्ले में काम कर चुके हैं। जब आप वजूद में आई तो उन्होंने केजरीवाल का बुत बनाकर मान को सरप्राइज करने की सोची।

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English summary
Pictures from a wax museum in Punjab were widely circulated on social media on Monday. The images released by Prabhakar’s Wax Museum in Ludhiana had little or no resemblance to the personalities concerned, leaving the internet in splits.
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