क्या है सेंगोल? जिसे नए संसद भवन में स्पीकर की कुर्सी के पास रखा जाएगा; जानें पूरा इतिहास
28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए संसद भवन की इमारत का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान राजदंड सेंगोल को भवन में स्पीकर की कुर्सी के पास स्थापित किया जाएगा।

भारतीय संसदीय इतिहास में 28 मई को एक नया अध्याय जुडने जा रहा है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए संसद भवन की इमारत का उद्घाटन करेंगे। हालांकि, इसको लेकर सियासी घमासान मचा है। एक तरफ 19 विपक्षी दल उद्घाटन समारोह के बहिष्कार करने की रणनीति बना रहे हैं। दूसरी तरफ गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि भवन में स्पीकर की कुर्सी के पास राजदंड सेंगोल स्थापित किया जाएगा।
उद्घाटन समारोह 28 मई को है। शाह ने यह भी बताया कि सेंगोल का देश की आजादी से अहम रिश्ता है। साथ ही दक्षिण भारत के एक बड़े हिस्से पर राज करने वाले चोल साम्राज्य से ताल्लुक रखता है। आइए हम आपको रूबरू कराते हैं सेंगोल से...
5 फीट लंबी और 800 ग्राम वजनी
सेंगोल एक तमिल शब्द है। जिसका मतलब धन धान्य से भरपूर होता है। सेंगोल का वजन 800 ग्राम है। यह गोल्ड प्लेटेड की बनी हुई है। इसकी लंबाई 5 फीट है। शाह ने बताया कि इसको नई संसद भवन में स्पीकर की कुर्सी के पास रखा जाएगा। अधीनम संप्रदाय के 20 पुजारी आएंगे। यह अंग्रेजों से सत्ता ट्रांसफर का प्रतीक है। अमृत काल का प्रतिबिंब है।
देश की आजादी से गहरा नाता
14 अगस्त 1947 में भारत की सत्ता अंग्रेजों से ट्रांसफर हुई। उस वक्त लॉर्ड माउंटबेटन ने पंडित नेहरू से पूछा कि सत्ता ट्रांसफर कैसे की जाए। इसपर पंडित नेहरू ने सी राजगोपालाचारी(राजाजी उपनाम) संग विचार विमर्श किया। जिसमें राजाजी ने नेहरू को 'सेंगोल प्रक्रिया' के बारे में बताया। इसके बाद तमिलनाडु सेंगोल मंगाया गया और पंडित नेहरू ने स्वीकार किया। इसलिए इसे सेंगोल सत्ता के ट्रांसफर का प्रतीक माना जाता है।
1947 के बाद कहां विलुप्त हो गया ?
साल 1960 में इसे इलाहाबाद संग्रहालय भेजा गया। 1978 कांचीपुरम मठ प्रमुख ने एक किताब लिखी। जिसमें राजदंड के बारे में पूरी घटना का वर्णन किया। करीब डेढ़ साल पहले पीएम मोदी ने इस राजदंड को तलाशने के निर्देश दिए। तीन से चार महीने तक गहन खोज चली, लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसी बीच इलाहाबाद म्यूजियम के क्यूरेटर का फोन मंत्रालय पहुंचा और उन्होंने इस छड़ी के बारे में जानकारी दी।
क्या है इसकी बनावट ?
इस पर तमिल शिलालेख है कि यह नेहरू को दिया गया था। सेंगोल के टॉप पर भगवान शिव के दूत नंदी की प्रतिमा बनी है।












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