देश के बिगड़ते हालात को बयां करता मोदी को लिखा रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स का ओपेन लेटर
लेटर में अखलाक और पहलू खान का जिक्र है। इसमें लिखा गया है कि कैसे बीफ के शक में अखलाक को मार दिया गया।
नई दिल्ली। सरकार के नाम खुला खत लिखने का मानों ट्रेंड सा चल पड़ा है। इसी क्रम में नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर 65 रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स ने खत लिखा है। हालांकि यह खत सीधे तौर पर सरकार के नाम नहीं है लेकिन उनमें जिन दिक्कतों का जिक्र है वो केंद्र सरकार से जुड़ी हुई हैं। इस लेटर में ब्यूरोक्रेट्स ने देश में बढ़ती असहिष्णुता, तानाशाही और बहुसंख्यकवाद पर चिंता जताया गया है और इसके लिए ठोर कदम उठाए जाने की अपील की है।

देश के बिगड़ते माहौल से व्यथित
रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स ने अपने लेटर में पहले ही साफ-साफ लिख दिया है कि वो किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं। उन्होंने यह लेटर इसलिए लिखा है क्योंकि देश के बिगड़ते माहौल से वो खासा दुखी हैं। उन्होंने लेटर में लिखा है कि 'मौजूदा वक्त में लोगों में डर है कि कहीं उनका ओपिनियन हाइजैक न कर लिया जाए।'

लेटर में सभी घटनाओं का है जिक्र
लेटर में सिलसिलेवार ढंग से घटनाओं का हवाला दिया गया है कि कैसे यूपी में श्मशान-कब्रिस्तान की तुलना हुई, बिना किसी आंकड़ों के हिंदू-मुस्लिमों के त्योहारों पर बिजली सप्लाई को लेकर जुमलेबाजी हुई, किस तरह स्लॉटर हाउस बैन होने से अल्पसंख्यकों की रोजी पर असर पड़ा और कैसे इन घटनाओं से यूपी में सांप्रदायिक तनाव फैल रहा है।

गोरक्षकों को सरकारी तंत्र से प्रोत्साहन
लेटर में अखलाक और पहलू खान का जिक्र है। इसमें लिखा गया है कि कैसे बीफ के शक में अखलाक को मार दिया गया। वहीं पहलू खान को जरूरी कागजात होने के बावजूद मारा गया। वहीं ऐसा करने वाले गोरक्षकों को सरकारी तंत्र से प्रोत्साहन मिल रहा है। लेटर लिखने वाले रिटायर्ड ब्यूक्रेट्स उस भीड़तंत्र को देखकर परेशान हैं, जो कानून हाथ में लेता है और फिर साफ बच निकलता है।

ट्रोलिंग को लेकर चिंता
इस चिट्ठी में ब्यूरोक्रेट्स की तरफ से सबसे बड़ी चिंता ट्रोलिंग को लेकर जताई है। लेटर में लिखा गया है कि अगर कोई बहुसंख्यक विचारधारा से सहमत नहीं होते, तो उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जाता है। हाइपर-नेशनलिज्म के इस दौर में अगर आप सरकार के साथ नहीं, तो आप देशद्रोही हैं। इनकी सरकार से अपील है कि ऐसे विचलित करने वाले ट्रेंड्स को रोका जाए, ताकि भारतीय संविधान की मूल भावना दोबारा स्थापित हो सके।












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