Bhopal Gas Tragedy के पीड़ितों पर ना हो कोरोना वैक्सीन का ट्रायल, PM मोदी को NGO ने लिखा पत्र
Stop Covaxin trial on Bhopal gas tragedy survivors,its not safe: कोरोना से जंग लड़ रहे भारत देश के हर नागरिक बेसब्री से कोरोना वैक्सीन का इंतजार कर रहा है लेकिन इसी बीच एमपी की राजधानी भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 को हुए भीषण गैस त्रासदी के पीड़ितों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल ना करने की मांग की गई है। एक एनजीओ की ओर से पीएम मोदी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को पत्र लिखकर अपील की गई है कि गैस पीड़ितों पर वैक्सीन का ट्रायल ना किया जाए क्योंकि वो पहले से ही बहुत सारी बीमारियों से ग्रसित हैं ऐसे में उन पर ट्रायल करना खतरनाक हो सकता है।

एनजीओ संगठन का कहना है कि भोपाल में अब तक 1700 लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल किया गया है, उनमें करीब 700 लोग गैस पीड़ित हैं। इन पीड़ितों को वैक्सीन के पहले डोज के ही बाद कुछ दिक्कतें शुरू हो गई इसलिए हमारी अपील है गैस त्रासदी के लोगों पर कोई ट्रायल ना हो, यही नहीं संगठनों ने आरोप लगाए हैं कि ट्रायल करने वाली संस्था ने वॉलंटियर के रिकार्ड नहीं रखे।
वैक्सीन ट्रायल की गाइडलाइन का उल्लंघन
तबीयत खराब होने के बाद उन्हें इलाज भी नहीं दिया। यह वैक्सीन ट्रायल की गाइडलाइन का उल्लंघन है। जबकि जांच कमेटी ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि जिनको भी वैक्सीन का डोज दिया है उनकी हर वक्त जानकारी ली गई है, हमारे पास सबके फोन रिकॉर्ड है और किसी पर भी वैक्सीन लेने का दवाब नहीं बनाया गया था, सबने स्वेच्छा से डोज लिया है।
भोपाल गैस त्रासदी
गौरतलब है कि 2-3 दिसंबर की रात साल 1984 में भोपाल में यूनियन कार्बाइड के कारखाने से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। जिसके चलते हजारों लोगों की मौत हो गई थी। त्रासदी के इतने साल बाद भी पीड़ित चैन से नहीं जी पा रहे हैं। वह आज भी कई तरह की दिक्कतों से घिरे हुए हैं। एक ट्रस्ट द्वारा भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों का इलाज किया जाता है। जिसने दावा किया है कि ये पीड़ित मोटापे और थायराइड जैसी बीमारियों का सामना कर रहे हैं। पीड़ितों का थायराइड रोग से ग्रसित होना बाकी लोगों के मुकाबले लगभग दोगुना है। यूनियन कार्बाइड गैस के कारण एंडोक्राइन सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा है और ये गैस्टिक और हड्डियों के रोग से ग्रसित हैं।












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