एसबीआई के लॉकर से मिला लाखों का सोना, अफीम, प्रॉपर्टी के कागज

नई दिल्ली। मोहाली की एसटीएफ यूनिट ने शुक्रवार को 21 लाख रुपए की कीमत की 116 ग्राम अफीम, एक लाख रुपए कैश व तमाम प्रॉपर्टी के दस्तावेज को अंबाला की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ब्रांच की लॉकर से जब्त किया है। जानकारी के अनुसार जिस महिला का यह लॉकर है वह ड्रग डीलर है। आरोपी ड्रग डीलर का नाम स्वीटी है, जिसकी उम्र 35 वर्ष है, जोकि मौजूदा समय में अंबाला जेल में है। एसटीएफ की टीम महिला को लेकर लॉकर खोलने के लिए बैंक पहुंची थी, जहां लॉकर खोलने पर यह तमाम चीजें बरामद की गई।

कोर्ट से ली थी अनुमति

कोर्ट से ली थी अनुमति

सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस राजेंद्र सोहल ने बताया कि उन्होंने गुरप्रीत सिंह को 6 दिसंबर को गिरफ्तार किया था, पुलिस को इस बात की जानकारी मिली थी कि उसके पास कुछ नशीला पदार्थ है, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसने इस बात का खुलासा किया कि वह स्वीटी की कूरियर कंपनी में काम करता है, स्वीटी का पति बलदेव सिंह भी पटियाला की जेल में बंद है। एसपी ने बताया कि स्वीटी अंबाला जेल में बंद है, लिहाजा हमने स्थानीय कोर्ट से उसे बैंक में ले जाने की अनुमति प्राप्त की थी।

ड्रग रैकेट का हाथ

ड्रग रैकेट का हाथ

एसपी ने बताया कि हमने स्वीटी के व्यक्तिगत लॉकर को खोलने की इजाजत कोर्ट से ली थी। बैंक की यह ब्रांच अंबाला के एसए जैन कॉलेज में है, जब हमने यह लॉकर खोला तो उस वक्त बैंक मैनेजर तारसेन सिंह वहां मौजूद थे, जहां से हमे एक लाख रुपए कैश, 116 ग्राम अफीम, 707.47 ग्राम सोना बरामद किया। उन्होंने बताया कि ऐसा लगता है यह पैसा ड्रग्स बेचकर जमा किया गया है, जबकि सोना ड्रग्स बेचकर जो पैसा हासिल हुआ उससे खरीदा गया है। जांच अधिकारी सब इंसपेक्टर राम दर्शन ने बताया कि स्वीटी अंबाला और पंजाब में ड्रग्स सप्लाई का काम करती थी, उसके अधिकतर परिवार के सदस्य ड्रग्स बेचने के आरोप में शामिल हैं और उनपर मुकदमा चल रहा है, जिसमे स्वीटी का पति भी शामिल है।

पूरे परिवार पर चल रहा है मामला

पूरे परिवार पर चल रहा है मामला

एसपी राजेंद्र सोहल ने बताया कि लॉकर से जो दस्तावेज हासिल हुए हैं उसमे 12 संपत्तियों के कागज शामिल हैं, जिनका वेरिफिकेशन कराया गया है। एसओ राम दर्शन ने बताया कि बलदेव को 23 दिसंबर 2016 में गिरफ्तार किया गया था जब उसके पास 3 किलोग्राम अफीम बरामद किया गया था। बलदेव जेल के भीतर मनोज कुमार नाम के एक और ड्रग डीलर से मिला और दोनो दोस्त बन गए, जिसके बाद दोनों ने फैसला लिया कि जेल के अंदर से ही ड्रग डीलिंग का काम करेंगे, जिसके बाद बलदेव ने अपनी पत्नी को इस धंधे में लगाया। बलदेव से निर्देश लेने के बाद स्वीटी दिल्ली के नाईजीरियाई लोगों से ड्रग खरीदती थी जोकि मनोज के संपर्क में थे। जिसके बाद ये लोग ड्रग लेकर वापस चंडीगढ़ आते थे और ड्रग को गुरप्रीत के पास भेज देते थे, जहां से वह ग्राहकों से पैसा इकट्ठा करते थे। गौरतलब है कि स्वीटी के खिलाफ चार मामलों में मुकदमा चल रहा है।

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