लेटरल एंट्री के जरिए नियुक्ति पर भड़के अखिलेश और मायावती, कहा- ये BJP की साजिश है, आंदोलन की दी धमकी
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सरकारी कामकाज में 5 साल पहले एक नया तरीका लाई थी, जिसको लेटरल एंट्री (Lateral Entry) कहा जाता है। अब लेटरल एंट्री के जरिए नियुक्ति पर विपक्ष मोदी सरकार का विरोध कर रहा है। समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने लेटरल एंट्री के लिए आवेदन मांगने के सरकार के कदम की आलोचना की है।
सपा और बसपा ने लेटरल एंट्री के जरिए नियुक्ति को पिछले दरवाजे से अपने वैचारिक सहयोगियों को उच्च पदों पर नियुक्त करने की भाजपा की "साजिश" कहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर 2 अक्टूबर से आंदोलन की चेतावनी दी है।

अखिलेश यादव ने लेटरल एंट्री पर क्या कहा?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, ''भाजपा अपनी विचारधारा के संगी-साथियों को पिछले दरवाज़ से यूपीएससी के उच्च सरकारी पदों पर बैठाने की जो साजिश कर रही है, उसके खिलाफ एक देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने का समय आ गया है। ये तरीका आज के अधिकारियों के साथ, युवाओं के लिए भी वर्तमान और भविष्य में उच्च पदों पर जाने का रास्ता बंद कर देगा। आम लोग बाबू व चपरासी तक ही सीमित हो जाएंगे।''
अखिलेश यादव ने आगे कहा, ''दरअसल से सारी चाल पीडीए से आरक्षण और उनके अधिकार छीनने की है। अब जब भाजपा ये जान गयी है कि संविधान को ख़त्म करने की भाजपाई चाल के खिलाफ देश भर का पीडीए जाग उठा है तो वो ऐसे पदों पर सीधी भर्ती करके आरक्षण को दूसरे बहाने से नकारना चाहती है।''
अखिलेश यादव ने कहा- भाजपा सरकार इसे तत्काल वापस ले क्योंकि ये देशहित में नहीं है
अखिलेश यादव ने कहा, ''भाजपा सरकार इसे तत्काल वापस ले क्योंकि ये देशहित में भी नहीं है। भाजपा अपनी दलीय विचारधारा के अधिकारियों को सरकार में रखकर मनमाना काम करवाना चाहती है। सरकारी कृपा से अधिकारी बने ऐसे लोग कभी भी निष्पक्ष नहीं हो सकते। ऐसे लोगों की सत्यनिष्ठा पर भी हमेशा प्रश्नचिन्ह लगा रहेगा।''
अखिलेश यादव 2 अक्टूबर से करेंगे आंदोलन
अखिलेश यादव बोले, ''देशभर के अधिकारियों और युवाओं से आग्रह है कि यदि भाजपा सरकार इसे वापस न ले तो आगामी 2 अक्टूबर से एक नया आंदोलन शुरू करने में हमारे साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर खड़े हों। सरकारी तंत्र पर कारपोरेट के क़ब्ज़े को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे क्योंकि कारपोरेट की अमीरोंवाली पूंजीवादी सोच ज़्यादा-से-ज़्यादा लाभ कमाने की होती है। ऐसी सोच दूसरे के शोषण पर निर्भर करती है, जबकि हमारी 'समाजवादी सोच' गरीब, किसान, मजदूर, नौकरीपेशा, अपना छोटा-मोटा काम-कारोबार-दुकान करनेवाली आम जनता के पोषण और कल्याण की है। ये देश के विरूद्ध एक बड़ा षड्यंत्र है।''
मायावती ने लेटरल एंट्री पर क्या कहा?
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, ''केन्द्र में संयुक्त सचिव, निदेशक एवं उपसचिव के 45 उच्च पदों पर सीधी भर्ती का निर्णय सही नहीं है, क्योंकि सीधी भर्ती के माध्यम से नीचे के पदों पर काम कर रहे कर्मचारियों को पदोन्नति के लाभ से वंचित रहना पड़ेगा। इसके साथ ही, इन सरकारी नियुक्तियों में SC, ST व OBC वर्गों के लोगों को उनके कोटे के अनुपात में अगर नियुक्ति नहीं दी जाती है तो यह संविधान का सीधा उल्लंघन होगा।''
मायावती ने आगे कहा, ''इन उच्च पदों पर सीधी नियुक्तियों को बिना किसी नियम के बनाये हुये भरना यह बीजेपी सरकार की मनमानी होगी, जो कि गैर-कानूनी एवं असंवैधानिक होगा।''












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