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दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे छोटे बच्चे का भारत में हुआ जन्म,सिर्फ 25 हफ्ते कोख में रहा

नई दिल्ली। यूं तो किसी भी बच्चे को मां की कोख में तकरीबन 9 महीने गुजारने होते हैं, जिससे कि वह एक बेहतर स्थिति में दुनिया में आ सके। छत्तीसगढ़ की रहने वाली नितिका ने दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे छोटी बच्ची को भारत में जन्म दिया है। जिस बच्चे को नितिका ने जन्म दिया है वह महज 25 हफ्ते ही मां की कोख में रही और जन्म के समय उसका वजन 375 ग्राम था। बच्चे के जन्म के बाद नितिका ने कहा कि हम छत्तीसगढ़ से हैदराबाद आए, लेकिन उस वक्त हमने किसी भी चीज की योजना नहीं बनाई थी, हमने इस बात का भी फैसला नहीं लिया था कि बच्चे को इतनी जल्दी जन्म देना पड़ेगा।

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जब हम यहां अस्पताल में गए तो डॉक्टरों ने काफी सकारात्मक तरीके से हमे जवाब दिया, इस बात की बहुत ही कम संभावना थी कि मेरी बच्ची पैदा होने के बाद जिंदा रहती, लेकिन इसके बाद भी हम इस सोच से आगे बढ़ें कि हमारा बच्चा स्वस्थ्य होगा। बच्चे के जन्म के बाद जब उसे अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया तो उसका वजन 2.5 किलोग्राम था और वह पूरी तरह से स्वस्थ्य है। नितिका का डिलिवरी कराने वाली रेंबो अस्पताल की वरिष्ठ डॉक्टर निताशा ने बताया बच्ची की जन्म 27 फरवरी 2018 को हुआ था और जन्म के समय उसका वजन 375 ग्राम था और लंबाई 26 सेंटीमीटर था।

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बचने की संभावना काफी कम थी

डॉक्टर ने बताया कि यह बच्ची दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे छोटी बच्ची है। जब बच्ची की मां नितिका को अस्पताल में भर्ती कराया गया तो बच्ची सिर्फ 24 हफ्ते की थी, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में यह सामने आया कि मां की कोख में बच्ची के आस-पास तरल पदार्थ काफी कम है। बच्ची के पास खून का प्रवाह भी बहुत कम था, इसी वजह से हमने सलाह दी कि बच्ची की डिलिवरी होनी चाहिए।

माता-पिता ने दिखाई हिम्मत

बच्ची के जन्म से पहले डॉक्टर ने बताया कि डिलिवरी से पहले हमारे सामने काफी चुनौती थी। डिलिवरी के बाद हमे इस बात का खयाल रखना था कि बच्ची को कितना खाना किस समय पर देना है, हमे बच्ची के इलाज और रखरखाव का पूरा खयाल रखना था। डॉक्टर ने बताया कि बच्ची को दो बार मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। डिलिवरी से पहले हमे बच्ची के परिवार की काउंसलिंग करनी पड़ी और उन्हे बताना पड़ा कि इस डिलिवरी में क्या चुनौतियां आ सकती हैं। बच्ची के माता-पिता ने काफी सकारात्मक रुख दिखाया।

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