Sonam Wangchuk Case: सोनम वांगचुक जेल से बाहर आएंगे या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दे दिया दो-टूक जवाब

Sonam Wangchuk Detention: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को फिलहाल रिहा नहीं किया जा सकता। पिछले साल लेह में हुई हिंसक घटनाओं के बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वांगचुक की पत्नी द्वारा उनकी बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए रिहाई की मांग की गई थी, जिस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि वांगचुक पूरी तरह स्वस्थ हैं और जेल मैनुअल के हिसाब से उनकी नियमित जांच हो रही है।

सरकार का तर्क है कि जिन आधारों पर उनकी हिरासत तय हुई थी, वे अब भी बरकरार हैं, इसलिए सुरक्षा कारणों से उन्हें छोड़ना फिलहाल मुमकिन नहीं है।

Sonam Wangchuk Case

सोनम वांगचुक की रिहाई से सरकार का इनकार

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने केंद्र का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि वांगचुक को मेडिकल ग्राउंड पर रिहा करना फिलहाल संभव नहीं है। सरकार का मानना है कि लेह में हुई हिंसा, जिसमें 4 लोगों की जान गई थी, उसके बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम जरूरी हैं। वांगचुक पर एनएसए (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है, और सरकार इसे देश की सुरक्षा से जोड़कर देख रही है।

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सेहत को लेकर क्या बोली केंद्र सरकार?

वांगचुक के परिवार ने उनकी गिरती सेहत को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन सॉलिसिटर जनरल ने इन दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जेल में वांगचुक की 24 बार जांच की जा चुकी है और वे 'फिट एंड हार्डी' यानी पूरी तरह तंदुरुस्त हैं। उन्हें केवल पाचन से जुड़ी मामूली समस्या थी, जिसका इलाज किया गया है। सरकार के मुताबिक, केवल स्वास्थ्य के बहाने ऐसे मामलों में छूट देना गलत उदाहरण पेश करेगा।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और दलीलें

यह पूरा मामला सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि की याचिका पर चल रहा है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच इस पर सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में अधिकारियों से मानवीय आधार पर विचार करने को कहा था, लेकिन सरकार ने अपने हलफनामे में साफ कर दिया है कि रिहाई "वांछनीय" नहीं है। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि अदालत सरकार की इन दलीलों पर क्या रुख अपनाती है।

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लेह हिंसा और एनएसए का मामला

सोनम वांगचुक की हिरासत के पीछे पिछले साल लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों का हाथ है। उन प्रदर्शनों में 150 से ज्यादा लोग घायल हुए थे और भारी जान-माल का नुकसान हुआ था। सरकार का आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे वांगचुक की भूमिका रही है, जिसकी वजह से उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया। फिलहाल यह कानूनी लड़ाई जारी है और लद्दाख के इस मुद्दे पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

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