बिहार: कौन ले हेडमास्टर का 'हेडेक', ऐसे ही चलाओ स्कूल

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जानकारी मिली है कि 73 हजार सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 60 हजार स्कूल ऐसे हैं, जहां 'हैडमास्टर' के बिना ही 'एबीसीडी' चल रही है। पिछले दिन मिली जानकारी में सामने आया कि कई जिम्मेदार पदों पर या तो अस्थायी लोग रखे गए हैं, या फिर वे पद किसी नई 'उम्मीद' की राह देख रहे हैं।
80 प्रतिशत स्कूल अपनी मंजिल तय करने अकेले ही निकल पड़े हैं, यहां हैडमास्टर जी का नाम सिर्फ कागजों पर दर्ज है। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी की मानें तो कई बार इस पर विचार किया गया, पर सख्ती ना होने की वजह से सारा काम 'राम भरोसे' चलता रहा। सूत्रों ने यह भी बताया कि कई वरिष्ठ शिक्षकों को प्रमोशन नहीं मिला, जिसे हैडमास्टरों की कुर्सियां धूल खाती रहीं।
प्रोन्नति न होने की वजहों में यह भी सामने आया कि संबंधित शिक्षक उस पैमाने में अयोग्य थे, जो सरकार ने इस पद के लिए निर्धारित किए हैं। आंकड़ों की मानें तो लगभग 85 हजार स्थायी शिक्षक हैं, जो अपना वेतन समय से पाते हैं, व सरकारी नौकरी का पूरा स्वाद चख रहे हैं।
लगभग 1 लाख से ज्यादा स्थायी शिक्षकों को नौनिहालों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अमरजीत सिंह का कहना है कि सरकार शिक्षकों की नियुक्ति व प्रोन्न्ति को लेकर गंभीर है, व जून के अंत तक ही प्रक्रिया शुरु हो जाएगी।












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