पेरिस जलवायु समझौते से भारत में लोगों की जिंदगी पर होंगे ये 6 बड़े असर

नई दिल्ली। पेरिस जलवायु समझौते को भारत ने रविवार को मंजूरी दे दी। पेरिस समझौते से लोगों की जीवनशैली, खान-पान, यात्रा समेत निजी और पेशेवर जिंदगी में बदलाव आएंगे।

आइए, पेरिस समझौते से लोगों की जिंदगी पर पड़ने वाले 6 सबसे ज्यादा बड़े असर के बारे में जानते हैं।

prakash javadekar

1. आपके घर की छत पर सोलर पैनल्स

जलवायु परिवर्तन के बुरे असर से मुकाबला करने के लिए सोलर पैनल्स और बड़े-बड़े विंड मिल्स (पवन चक्कियां) लगाए जाएंगे।

भारत 2022 तक सौर उर्जा से 100 गीगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता का लक्ष्य लेकर चल रहा है जिसमें 40 गीगावाट का उत्पादन लोगों के घरों की छतों पर सोलर पैनल्स लगाकर होगा।

देश में 2022 तक पवन से 60 गीगावाट उर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। पहले से ही सौर उर्जा और पवन चक्कियों के माध्यम से कई गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

सौर, पवन, बायोगैस और छोटे छोटे हायड्रो संयत्रों से बिजली उत्पादन से देश में 20 करोड़ लोगों के घरों को रोशन किया जा सकता है जो अभी भी अंधेरे में जीने को मजबूर हैं।

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2. घरों में बिजली की खपत में कमी के उपाय

2030 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में प्रति जीडीपी यूनिट 33 से 35 प्रतिशत की कमी लाने के लिए भारत कई उपाय करेगा। इसके लिए सबसे पहले घरेलू बिजली की खपत में कमी करने का लक्ष्य है।

इसके लिए बिजली से चलने वाले एसी, रेफ्रीजरेटर और टीवी जैसे घरेलू उपकरणों को और ज्यादा बेहतर बनाया जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 3 करोड़ से ज्यादा घरों में बिजली की खपत कम करने वाले लगभग 16.5 करोड़ एलईडी बल्ब जल रहे हैं।

3. शहरों में ई-रिक्शा, मेट्रो और बिजली की कारें

शहरों में बैटरी ई-रिक्शा और बिजली से चलने वाली कारों का प्रचलन बढ़ रहा है।

ईंधन की क्षमता के और बेहतर तरीके से इस्तेमाल को कड़ाई से लागू करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है और 2020 तक भारत VI पल्यूशन नॉर्म्स को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

बड़े शहरों में मेट्रो लाइन बिछाए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ परिवहन की समस्याओं का समाधान मिलेगा बल्कि प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी।

4. ज्यादा से ज्यादा पेड़ और जंगल

भारत ने वादा किया है कि 2030 तक जंगल का विकास कर और पेड़ लगाकर वातावरण से 2.5 से 3 अरब टन कार्बन डाईऑक्साइड सोखने की व्यवस्था की जाएगी।

भारत में कुल भूभाग के 24 प्रतिशत क्षेत्र में जंगल और पेड़ हैं। इसे बढ़ाकर 33 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, यह मुश्किल काम है क्योंकि जंगल का विकास इतनी जल्दी होता नहीं है और औद्योगिक विकास के कामों में पेड़ काटे जाते हैं। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने का विकल्प है।

भारत ने पिछले पार्लियामेंट सेशन में एक बिल पास किया जिसमें यह कहा गया है कि जहां भी जंगल के जितने क्षेत्र का सफाया किसी भी कारण से हुआ है, वहां फिर से जंगल का विकास किया जाएगा।

इस ग्रीन इंडिया मिशन के तहत सरकार करोड़ों रुपया खर्च कर रही है। हाईवे और रेलवे ट्रैक के किनारे-किनारे बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने की योजना पर काम चल रहा है।

5. बिल्डिंग्स होंगे स्मार्ट

सरकार के लक्ष्य के अनुसार, 2030 तक आधारभूत ढांचा के 70 प्रतिशत का निर्माण करना अभी बाकी है, जिसमें स्मार्ट सिटीज और बिल्डिंग्स शामिल हैं।

ये बिल्डिंग्स स्मार्ट और नेट जीरो होंगे। नेट जीरो का मतलब यह हुआ कि साल में बिल्डिंग में जितनी उर्जा खर्च की जाएगी, उसी अनुपात में वहीं पर उर्जा का नवीनीकरण भी होगा।

नए बिल्डिंग्स को ग्रीन पैरामीटर्स पर रेटिंग दिए जाएंगे। बिजली और पानी की खपत के आधार पर इंसेटिव्स या पेनल्टी का भी प्रावधान किया जाएगा।

6. पानी की कीमत देनी होगी

जलवायु परिवर्तन की वजह से वैश्विक स्तर पर पानी की कमी होने के आसार हैं। जिस देश में पहले से ही पानी का अभाव हो वहां इसके प्रबंधन के लिए तेजी से सुधार की ज्यादा जरूरत है।

देश में पानी की खपत कम करने की कोशिशें हो रही हैं। भविष्य में पानी के किसी भी तरह के उपयोग के लिए कीमत चुकानी होगी।

जमीन के मालिक ग्राउंडवाटर का मनमाना दोहन नहीं कर पाएंगे। उन पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। उद्योगों को सिर्फ शोधित पानी के ही इस्तेमाल की इजाजत होगी।

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