अहम चुनावों से पहले आप को राहत, मनीष सिसोदिया की जमानत ने पार्टी में फूंकी नई जान

सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को जमानत मिल गई। कोर्ट का फैसला ऐसे समय पर आया है। जब पार्टी कई राज्यों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। कथित शराब नीति घोटाले में मनीष सिसोदिया को पिछले साल 26 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था।

जिस वक्त मनीष सिसोदिया को अरेस्ट किया गया था, वह उस समय दिल्ली के डिप्टी सीएम थे। सिसोदिया आप नेता अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी भी हैं। उनकी गिरफ्तारी का पार्टी पर काफी प्रभाव देखने को मिला था। यही नहीं पार्टी चीफ अरविंद केजरीवाल भी इस समय जेल में बंद हैं।

Sisodia s bail gives boost to AAP ahead of Haryana Delhi polls

अपनी गिरफ्तारी से पहले मनीष सिसोदिया महत्वपूर्ण स्थितियों को संभालने और राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी का प्रतिनिधित्व करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। पार्टी के भीतर उनकी अनुपस्थिति का गहरा असर पड़ा है। कई नेताओं का कहना है कि उनकी मौजूदगी फर्क ला सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बिना मुकदमे के 17 महीने की उनकी कैद को उनके त्वरित न्याय के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए उन्हें जमानत देने का फैसला पार्टी द्वारा स्वागत किया गया है।

जमानत ऐसे समय में हुई है जब आप आने वाले महीनों में हरियाणा विधानसभा चुनाव और दिल्ली चुनाव की तैयारी कर रही है। पार्टी के नेता मानते हैं कि सिसोदिया की रिहाई से उनके प्रचार अभियान में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता दुर्गेश पाठक ने कहा कि सिसोदिया की रिहाई से आप को बदनाम करने के प्रयासों का मुकाबला करने और चुनावों में उनके अवसरों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी, संभवतः पिछले चुनावों की तुलना में अधिक सीटें जीतेगी।

पार्टी के नेता सिसोदिया की चुनाव प्रचार में मजबूती लाने में भूमिका को लेकर आशावादी हैं, खासकर दिल्ली में, जहाँ उनका लक्ष्य लगातार तीसरी बार सत्ता में आना है। आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि, सिसोदिया की जमानत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा है और उम्मीद जताई कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी जल्द ही रिहा हो जाएँगे।

आप के सामने चुनौतियाँ

2022 से 2024 की अवधि आप के लिए चुनौतीपूर्ण रही है क्योंकि उनके कई वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी हुई है। चुनावी लाभ और राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के बावजूद पार्टी कई दिक्कतों का सामना करती रही है। मुसीबतों की शुरुआत मई 2022 में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तारी के साथ हुई थी।

जुलाई 2022 में, उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने आबकारी नीति में नियमों के उल्लंघन और प्रक्रियात्मक चूकों के आरोपों की सीबीआई जांच की सिफारिश की। इस घटनाक्रम के शुरू होने के साथ ही सिसोदिया की गिरफ्तारी की अटकलें लगनी शुरू हो गई थीं, क्योंकि उन्होंने इस नीति को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसने पूरी दिल्ली में निजी बोली लगाने वालों को खुदरा लाइसेंस दिए थे। सिसोदिया को अंततः 26 फरवरी को सीबीआई ने गिरफ्तार किया और बाद में ईडी ने आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया।

नेतृत्व में बदलाव

अपनी गिरफ्तारी के बाद सिसोदिया ने दिल्ली कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। जिसके चलते अतिशी और सौरभ भारद्वाज को मंत्री के रूप में शामिल किया गया। अक्टूबर में संजय सिंह को भी ईडी ने आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार किया था लेकिन इस साल अप्रैल में उन्हें जमानत मिल गई।

वहीं आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च को ईडी ने आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार किया था, लेकिन लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई थी। उन्होंने 2 जून को आत्मसमर्पण कर दिया और 26 जून को तिहाड़ जेल से सीबीआई ने फिर से गिरफ्तार कर लिया।

हालांकि केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ईडी मामले में अंतरिम जमानत मिल गई है, लेकिन वह सीबीआई की चल रही कार्यवाही के कारण जेल में ही हैं। सिसोदिया की जमानत ने आप के भीतर उम्मीद जगा दी है कि केजरीवाल और जैन भी जल्द ही रिहा हो सकते हैं।

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