Sikkim Landslide Update: 1,100 टूरिस्ट रेस्क्यू, 1,800 अब भी फंसे — पहाड़ों की गोद में फंसी जिंदगियां
Sikkim Landslide Update: 'हमने सोचा था कि यह हमारी ज़िंदगी की सबसे शांतिपूर्ण यात्रा होगी... लेकिन पहाड़ों ने हमें वहीं रोक दिया।'...यह अलफाज हैं - रश्मि अग्रवाल, एक पर्यटक जो लाचुंग में फंसी हैं। सिक्किम की उत्तरी वादियों में प्राकृतिक सुंदरता देखने पहुंचे हजारों पर्यटक इस समय जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं।
भारी बारिश और भूस्खलन ने इलाके की मुख्य सड़कों को काट दिया है, जिससे करीब 2,900 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं - जिनमें बच्चे, बुज़ुर्ग, और विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

चुंगथांग से राहत की शुरुआत
चुंगथांग कस्बे में फंसे करीब 1,100 पर्यटकों को गुरुवार की रात गुरुद्वारे में शरण दी गई थी। शुक्रवार को प्रशासन ने उन्हें 200 वाहनों के काफ़िले में संगकालांग के रास्ते जिला मुख्यालय मंगन पहुंचाया - जहां नवनिर्मित बेली ब्रिज के ज़रिए यातायात बहाल किया गया था।
लाचेन और लाचुंग में अब भी 1,800 लोग फंसे
पर्यटन स्थलों लाचुंग और लाचेन, जो गुरुडोंगमार झील और युमथांग घाटी जैसे आकर्षणों के लिए प्रसिद्ध हैं, वहां भूस्खलन ने संपर्क पूरी तरह से काट दिया है।
- लाचुंग-चुंगथांग रोड पर लेमा/बॉब में,
- और लाचेन-चुंगथांग रोड पर मुंशीथांग में
- भूस्खलन के कारण सड़कों की हालत बेहद खराब है।
प्रशासन सड़क साफ करने का कार्य युद्धस्तर पर कर रहा है, लेकिन लगातार बारिश इस मिशन में बाधा बन रही है।
प्रशासन और सेना की सतर्कता
राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग खुद स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने सभी पर्यटक परमिट अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए हैं। टूर ऑपरेटरों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी नए पर्यटक को उत्तर सिक्किम की ओर न भेजा जाए।
पर्यटकों की ज़ुबानी: डर, धैर्य और उम्मीद
दिल्ली से आए एक दंपति ने बताया, 'हमारे पास केवल दो दिन का राशन है। होटल स्टाफ ने मदद की है, लेकिन हर गुजरती रात डरावनी है। मोबाइल नेटवर्क भी कभी-कभी गायब हो जाता है।' एक अन्य पर्यटक ने कहा, 'बर्फ़ और हरियाली की जगह अब केवल कीचड़ और चट्टानें दिखती हैं। हम घर लौटने की राह देख रहे हैं।'
यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक परीक्षा है
सिक्किम, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और शांति के लिए प्रसिद्ध है, अब एक जटिल बचाव अभियान का केंद्र बन गया है। यह घटना एक बार फिर हिल टूरिज़्म इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाओं और आपदा प्रबंधन के टेस्ट की कहानी बन रही है।
पहाड़ों की गोद में फंसी ज़िंदगियां
यह संकट हमें याद दिलाता है कि पर्यावरण की अनदेखी और मौसम के बदलते मिज़ाज में यात्रा योजनाएं जानलेवा भी हो सकती हैं। राहत अभियान जारी है, लेकिन जब तक अंतिम पर्यटक सुरक्षित नहीं लौटता - सिक्किम का ये सन्नाटा टूटेगा नहीं।












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