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Axiom-4 Missions: 28 घंटे की अंतरिक्ष यात्रा, 14 दिन का मिशन, कौन से 7 अनोखे प्रयोग करेंगे Shubhanshu Shukla?

Shubhanshu Shukla Experiments in ISS: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। 25 जून 2025 को दोपहर 12:01 बजे (IST) नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा से SpaceX के फाल्कन 9 रॉकेट और नए ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए यह लॉन्च हुआ। 41 साल बाद भारत का कोई अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में गया है। 1984 में राकेश शर्मा के बाद शुभांशु पहले भारतीय हैं, जो स्पेस में पहुंच रहे हैं।

28 घंटे 50 मिनट की यात्रा के बाद ISS पहुंचने वाले शुभांशु इस मिशन में 14 दिन बिताएंगे। उनके साथ मिशन कमांडर पैगी व्हिट्सन (पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री), पोलैंड के मिशन एक्सपर्ट स्लावोज उज्नान्स्की-विस्निएव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू हैं। यह मिशन भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान में नया अध्याय है। आइए जानते हैं, शुभांशु ISS पर कौन से 7 वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे....

Shubhanshu Shukla Experiments
  • मांसपेशियों का पुनर्जनन (Muscle Regeneration) : माइक्रोग्रैविटी में पोषण सप्लीमेंट्स का मांसपेशियों की रिकवरी और विकास पर प्रभाव जांचा जाएगा। यह मंगल मिशन और पृथ्वी पर मांसपेशी रोगों के लिए उपयोगी हो सकता है।
  • मूंग और मेथी का अंकुरण (Sprouts & Seed Germination): मूंग और मेथी के बीजों का अंतरिक्ष में अंकुरण और विकास का अध्ययन। यह अंतरिक्ष में खेती के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
  • माइक्रोएल्गी: भविष्य का सुपरफूड (Microalgae Growth) : स्पिरुलिना और साइनोकोस जैसे सूक्ष्म शैवालों की वृद्धि और प्रोटीन उत्पादन का विश्लेषण। ये बंद-लूप जीवन समर्थन प्रणालियों में सहायक होंगे।
  • टार्डीग्रेड की जीवटता (Tardigrade Survival) : अंतरिक्ष की चरम स्थितियों में टार्डीग्रेड (वाटर बेयर) की जीवित रहने और प्रजनन क्षमता का अध्ययन।
  • मानव-तकनीकी इंटरैक्शन (Human-Tech Interaction) : माइक्रोग्रैविटी में स्क्रीन डिस्प्ले पर आंख-हाथ समन्वय और संज्ञानात्मक कार्यों पर मानव व्यवहार का विश्लेषण।
  • फसलों पर अंतरिक्ष का प्रभाव (Crop Seeds in Space): छह फसली बीजों की अंतरिक्ष यात्रा के दौरान वृद्धि और परिवर्तन का अध्ययन। यह भारत-केंद्रित कृषि अनुसंधान का हिस्सा है।
  • संज्ञानात्मक प्रभाव (Cognitive Impact of Displays): कंप्यूटर स्क्रीन से जुड़े तनाव, नेत्र गति और उपयोग के बदलावों का विश्लेषण।

क्या है मिशन का महत्व?

यह मिशन नासा-इसरो सहयोग का हिस्सा है, जो गगनयान मिशन और भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए आधार तैयार करेगा। इन प्रयोगों के परिणाम अंतरिक्ष में मानव जीवन और कृषि अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण होंगे। मिशन की अवधि 14 दिन है, जो पूरी तरह ISS पर व्यतीत होगी।

मिशन पर जाते वक्त शुभांशु ने क्या है?

नमस्कार, मेरे प्यारे देशवासियों! यह कैसा अद्भुत सफर है! 41 साल बाद हम फिर अंतरिक्ष में हैं। 7.5 किमी/सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए, मेरे कंधे पर तिरंगा मुझे आप सभी की याद दिलाता है। यह मेरी नहीं, 140 करोड़ भारतीयों की यात्रा है। आइए, भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत करें। जय हिंद! उधर, शुभांशु के माता-पिता और रिश्तेदार लखनऊ में उनकी इस उपलब्धि पर भावुक और उत्साहित हैं। उनकी मां आशा शुक्ला ने कहा कि मेरा बेटा देश का गौरव है।

एक्सर्ट्स की राय क्या है?

बेंगलुरु के जवाहरलाल नेहरू प्लैनेटेरियम के निदेशक डॉ. बी.आर. गुरुप्रसाद ने कहा कि यह मिशन 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का क्षण है। शुभांशु का पायलट होना और पैगी व्हिट्सन का नेतृत्व इसे ऐतिहासिक बनाता है। Axiom-4 मिशन भारत के अंतरिक्ष सपनों को नई उड़ान दे रहा है, और शुभांशु शुक्ला इसके प्रतीक हैं।

ये भी पढ़ें- ISS के लिए Shubhanshu Shukla ने भरी उड़ान, भारत सरकार ने मिशन के लिए Axiom Space को दिए कितने पैसे?

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