नए संसद भवन पर शिवसेना की तीखी प्रतिक्रिया, सामना में कहा- 'क्या इसकी जरूरत थी?'
संसद की नई बिल्डिंग के उद्घाटन पर शिवसेना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपे लेख में कहा गया है कि आखिर संसद के नई बिल्डिंग की क्या जरूरत थी।

संसद की नई बिल्डिंग को लेकर विपक्षी दलों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिवसेना ने संसद की नई बिल्डिंग को लेकर मुखपत्र सामना में संपादकीय लेख प्रकाशित किया है। इस लेख में संसद की नई बिल्डिंग की जरूरत पर ही सवाल खड़ा कर दिया गया है। कई विपक्षी दलों ने भी संसद की नई बिल्डिंग पर सवाल खड़ा किया है। 20 से अधिक दलों ने इसका विरोध किया है।
शिवसेना के मुखपत्र सामना में कहा गया है कि आज संसद भवन का उद्घाटन हो रहा है, लेकिन यह मान्यता और परंपरा के लिहाज से गलत है, इस तरह से लोकतंत्र पर कब्जा करना सही नहीं है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को किनारे करके संसद की नई बिल्डिंग का उद्घाटन किया जा रहा है।
शिवसेना ने कहा कि यह बिल्कुल भी मान्यता और परंपरा के खिलाफ है। भाजपा को छोड़कर सभी दलों ने इसके खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है। लेख में कहा गया है कि आखिर नए संसद भवना की क्या आवश्यकता थी। यह गैरजरूरी है। इस बिल्डिंग के जरिए विचारों पर बंधन और सत्ता का केंद्रीयकरण करके इसपर तानाशाही को पाला जा रहा है।
सामना में कहा गया है कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति को ही करना चाहिए था। राष्ट्रपति को औपचारिक और साधारण निमंत्रण भी नहीं भेजा गया, यह लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। 20 से अधिक दल इसका बहिष्कार कर रहे हैं।
संसद के नए भवन को लेकर शिवसेना ने कहा कि सबकुछ में मैं यानि मोदी, यह अहंकार है। इस भवन का प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन करना और राष्ट्रपति को नहीं बुलाने को संवैधानिक पद का अपमान बताया है।
बता दें कि संसद की नई बिल्डिंग का आज पूरे रीति-रिवाज के साथ उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत हुई। तकरीबन एक घंटे तक पूजा की गई, सर्वधर्म सभा का आयोजन हुआ। पूजा के बाद पीएम मोदी ने संसद की नई बिल्डिंग में सेंगोल की स्थापना की।












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